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जन्म प्रमाण पत्र के लिए आखिर क्यों भटक रही जनता? तहसील स्तर पर व्यवस्था बहाल करने की उठी बुलंद मांग!

जन्म प्रमाण पत्र के लिए आखिर क्यों भटक रही जनता? तहसील स्तर पर व्यवस्था बहाल करने की उठी बुलंद मांग!

गरीबों और मजदूरों की बढ़ी परेशानी, छोटे से काम के लिए काटने पड़ रहे सरकारी दफ्तरों के चक्कर; कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

बुरहानपुर। आम नागरिकों को सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने और उनकी परेशानियां कम करने के दावे उस समय सवालों के घेरे में आ जाते हैं, जब एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बनवाने के लिए लोगों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ें। बुरहानपुर जिले में जन्म प्रमाण पत्र के विलंबित पंजीयन से संबंधित तहसील स्तरीय व्यवस्था बंद होने के कारण आम नागरिकों को हो रही परेशानियों का मुद्दा अब उठने लगा है। इस व्यवस्था को पुनः शुरू करने की मांग को लेकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन/आवेदन सौंपा गया है।

ज्ञापन में बताया गया कि पूर्व में जन्म प्रमाण पत्र के विलंबित पंजीयन के मामलों में तहसील स्तर पर सक्षम प्राधिकारी के आदेश जारी होने की व्यवस्था थी। इससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के नागरिकों को स्थानीय स्तर पर ही राहत मिल जाती थी। लेकिन वर्तमान में यह व्यवस्था बंद होने से लोगों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

गरीब और मजदूर परिवारों की बढ़ी मुश्किलें

व्यवस्था बंद होने का सबसे अधिक असर गरीब, मजदूर और जरूरतमंद परिवारों पर पड़ रहा है। जिन लोगों के पास रोजी-रोटी कमाने के लिए समय निकालना भी मुश्किल होता है, उन्हें एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बनवाने के लिए बार-बार कार्यालयों में जाना पड़ रहा है। इससे न केवल उनका समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि आर्थिक परेशानी भी बढ़ रही है।

जन्म प्रमाण पत्र के बिना कई सरकारी काम प्रभावित

जन्म प्रमाण पत्र प्रत्येक नागरिक के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज है। स्कूल में प्रवेश, आधार कार्ड से संबंधित प्रक्रियाओं, सरकारी योजनाओं और विभिन्न शासकीय कार्यों में इसकी आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में विलंबित पंजीयन की प्रक्रिया को आम जनता के लिए सरल और सुलभ बनाना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

कलेक्टर से तीन प्रमुख मांगें

ज्ञापन के माध्यम से जिला प्रशासन से मांग की गई है कि—

1. जन्म प्रमाण पत्र के विलंबित पंजीयन से संबंधित सक्षम प्राधिकारी के आदेश जारी करने की तहसील स्तरीय व्यवस्था नियमानुसार पुनः शुरू की जाए।
2. यदि किसी शासकीय आदेश के कारण यह व्यवस्था बंद की गई है, तो जनहित में उसकी समीक्षा कर उचित निर्णय लिया जाए।
3. संबंधित तहसीलदारों एवं सक्षम अधिकारियों को आवश्यक अधिकार और स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं, ताकि नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों से मुक्ति मिल सके।

अब प्रशासन के फैसले पर टिकी आम जनता की निगाहें

जन्म प्रमाण पत्र जैसी बुनियादी नागरिक सुविधा के लिए लोगों को अनावश्यक भागदौड़ न करनी पड़े, इसके लिए प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाना जरूरी है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन आम नागरिकों की इस मांग पर कितनी गंभीरता दिखाता है और तहसील स्तर पर व्यवस्था बहाल करने को लेकर क्या निर्णय लेता है।

मेरी राय में सबसे दमदार हेडलाइन यही रहेगी:

"जन्म प्रमाण पत्र के लिए सरकारी दफ्तरों में भटक रही जनता! तहसील स्तर पर व्यवस्था बहाल करने की उठी मांग"

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