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₹33.80 लाख का ग्रीन स्पेस बना मवेशियों का अड्डा!घास-झाड़ियों में गुम हुई विकास की तस्वीर, जलभराव से भी नहीं मिली निजात

₹33.80 लाख का ग्रीन स्पेस बना मवेशियों का अड्डा!
घास-झाड़ियों में गुम हुई विकास की तस्वीर, जलभराव से भी नहीं मिली निजात।

नेपानगर | संवाददाता प्रदीप सिंह

बुरहानपुर जिले के नेपानगर के वार्ड क्रमांक 11 महारानी लक्ष्मीबाई में केंद्र शासन की योजना के तहत करीब ₹33 लाख 80 हजार की लागत से तैयार किया गया ग्रीन स्पेस गार्डन इन दिनों बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। 
जिस स्थान को शहरवासियों के लिए हरियाली, मनोरंजन और बेहतर वातावरण का केंद्र बनाया गया था, वहां अब घास-झाड़ियों का कब्जा नजर आ रहा है और मवेशी खुलेआम विचरण करते दिखाई दे रहे हैं।
गार्डन में इंसान कम, मवेशी ज्यादा
मौके की तस्वीरें गार्डन की मौजूदा स्थिति पर सवाल खड़े कर रही हैं।

 पूरे परिसर में घास और झाड़ियां काफी बढ़ गई हैं। देखरेख के अभाव में गार्डन की स्थिति ऐसी हो गई है कि यहां आम नागरिकों के पहुंचने के बजाय मवेशी चरते हुए नजर आ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए इस ग्रीन स्पेस का आखिर आमजन को कितना लाभ मिल रहा है?
जलभराव की समस्या ने बढ़ाई परेशानी
ग्रीन स्पेस में बारिश के बाद पानी भरने की समस्या भी सामने आई। ।


इस संबंध में 9 सितंबर को उपयंत्री प्रकाश बड़वाह से सवाल किए जाने पर उन्होंने करीब 10 से 12 दिनों में समस्या का निराकरण करने की बात कही थी। पानी की निकासी के लिए मुरम डालने की बात भी कही गई थी।
इसके बाद नगर पालिका द्वारा गार्डन परिसर में नाली खोदकर पानी निकालने का काम किया गया।

 बाउंड्रीवॉल के नीचे से भी पानी की निकासी के लिए रास्ता बनाया गया। हालांकि, मौके की स्थिति को देखकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह स्थायी समाधान है या फिलहाल काम चलाऊ व्यवस्था?


₹33.80 लाख के काम पर उठ रहे सवाल
एक ओर शासन द्वारा शहरों में बेहतर वातावरण और नागरिक सुविधाओं के लिए लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यदि तैयार ग्रीन स्पेस की नियमित साफ-सफाई और देखरेख नहीं हो तो योजना का उद्देश्य ही प्रभावित होता है।


स्थानीय लोगों का सवाल है कि ₹33.80 लाख की लागत से बने इस गार्डन की नियमित निगरानी, सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है? यदि समय रहते गार्डन की साफ-सफाई, जल निकासी और सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया गया तो लाखों रुपये की लागत से तैयार यह परिसर अपनी उपयोगिता खो सकता है।


अब देखना होगा कि नगर पालिका परिषद इस मामले में केवल अस्थायी जल निकासी का काम करती है या ग्रीन स्पेस को वास्तव में आमजन के उपयोग के लायक बनाने के लिए स्थायी व्यवस्था करती है।

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