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अलग 'भील प्रदेश' की मांग ने पकड़ा जोर, राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन; चार राज्यों के आदिवासी इलाकों को जोड़कर नए राज्य की मांग

बुरहानपुर। भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा ने अलग 'भील प्रदेश' राज्य के गठन की मांग को लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से भेजा गया, जिसमें संविधान के अनुच्छेद-3 के तहत राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र तथा केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली के आदिवासी बहुल क्षेत्रों को मिलाकर 'भील प्रदेश' के गठन की मांग उठाई गई।


ज्ञापन में कहा गया है कि भील समाज भारत के सबसे प्राचीन आदिवासी समुदायों में से एक है और आजादी के बाद उनका सांस्कृतिक क्षेत्र अलग-अलग राज्यों में बंट गया, जिससे उनकी सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान प्रभावित हुई है। संगठन का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन हो रहा है, जबकि स्थानीय लोगों को उनके अधिकार और विकास का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा ने मांग की है कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों को एक राज्य के रूप में संगठित कर वहां के लोगों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व, सांस्कृतिक संरक्षण और विकास का अधिकार सुनिश्चित किया जाए। ज्ञापन में अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा, प्रशासनिक सुधार और संवैधानिक प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने की भी मांग की गई है।
संगठन ने केंद्र सरकार से इस विषय पर गंभीरता से विचार कर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। यह मांग एक बार फिर आदिवासी समाज के बीच चर्चा का विषय बन गई है और आने वाले समय में इस मुद्दे पर आंदोलन तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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