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रंगों में घुली रिश्तों की मिठास: गोकुल चंद्रमा मंदिर में सास-बहू ने मिटाए मनमुटाव, खेली प्रेम की होली!

रंगों में घुली रिश्तों की मिठास: गोकुल चंद्रमा मंदिर में सास-बहू ने मिटाए मनमुटाव, खेली प्रेम की होली!
निमाड़ अंचल में आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला, जब सोमवार शाम 5 बजे गोकुल चंद्रमा मंदिर में सास-बहू की विशेष होली का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि रिश्तों में आई दूरियों को मिटाने का पावन अवसर बन गया।
मंदिर के आदित्य हरी कृष्ण मुखिया ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी इस अनूठी परंपरा का आयोजन उत्साह और श्रद्धा के साथ किया गया। इस दिन सास और बहुएं अपने आपसी मतभेदों और वाद-विवादों को पीछे छोड़कर मंदिर प्रांगण में एकत्रित होती हैं। यहां वे एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर गले मिलती हैं तथा नृत्य कर आपसी प्रेम और सौहार्द का संदेश देती हैं।
कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर रंगों से सराबोर नजर आया। ढोल और संगीत की मधुर धुनों पर सास-बहुओं ने जमकर नृत्य किया। चेहरे पर मुस्कान और मन में अपनापन लिए महिलाओं ने यह साबित कर दिया कि रिश्तों की मजबूती संवाद और प्रेम से ही संभव है।
आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि यहां होली केवल उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि संबंधों में नई शुरुआत के प्रतीक के रूप में मनाई जाती है। निमाड़ क्षेत्र में यह मंदिर अपनी इस अनोखी परंपरा के लिए विशेष पहचान रखता है। आसपास के गांवों से भी महिलाएं इस आयोजन में भाग लेने पहुंचती हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस परंपरा ने कई परिवारों में रिश्तों को नई ऊर्जा दी है। गोकुल चंद्रमा मंदिर की यह पहल समाज को यह संदेश देती है कि रंगों का त्योहार केवल खुशियां मनाने का अवसर नहीं, बल्कि दिलों की दूरियां मिटाने का भी माध्यम है।
निमाड़ की इस अनूठी सास-बहू होली ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब परंपरा में प्रेम का रंग घुल जाए, तो हर रिश्ता और भी खूबसूरत बन जाता है।

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