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हाथों के बल नर्मदा परिक्रमा कर रहे संत धरमपुरी महाराज का मंडला में प्रवेश

 


अद्भुत साधना: हाथों के बल नर्मदा परिक्रमा 

अद्भुत साधना: हाथों के बल नर्मदा परिक्रमा कर रहे संत धरमपुरी महाराज का मंडला में प्रवेश

  • कठिन तपस्या देख नतमस्तक हुए श्रद्धालु
  • जगह-जगह पुष्प वर्षा और जयकारों से हुआ आत्मीय स्वागत

मंडला  | आस्था और अटूट विश्वास की डगर पर चलते हुए ‘मां नर्मदा’ की परिक्रमा के कई रूप देखने को मिलते हैं, लेकिन संत धरमपुरी महाराज की साधना ने हर किसी को हैरत में डाल दिया है। हाथों के बल चलकर नर्मदा परिक्रमा कर रहे संत धरमपुरी महाराज ने जैसे ही मण्डला जिले की सीमा में प्रवेश किया, भक्तों का हुजूम उनके दर्शनों के लिए उमड़ पड़ा।

कठिन तपस्या और संकल्प

आमतौर पर पैदल परिक्रमा करना भी चुनौतीपूर्ण माना जाता है, लेकिन संत धरमपुरी महाराज अपनी इस यात्रा को हाथों के बल (शीर्षासन की मुद्रा में या हाथों के सहारे) पूर्ण कर रहे हैं। उनकी इस कठिन शारीरिक और आध्यात्मिक साधना को देखकर क्षेत्र के नागरिक और श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हैं। जिले के प्रवेश द्वार पर बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने उन पर फूलों की वर्षा की और ‘नर्मदे हर’ के जयघोष से आकाश गुंजायमान कर दिया।

भक्ति और कौतूहल का संगम

जैसे-जैसे महाराज जी का पड़ाव आगे बढ़ रहा है, उनकी एक झलक पाने के लिए गांवों और कस्बों में लोगों की भीड़ जमा हो रही है। ग्रामीणों ने उनके ठहरने और विश्राम के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस तरह की कठिन साधना कलियुग में ईश्वर के प्रति अनन्य भक्ति का साक्षात प्रमाण है।

जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत

जिले के विभिन्न पड़ावों पर सामाजिक संगठनों और स्थानीय समितियों द्वारा महाराज जी का भव्य स्वागत किया गया। पुष्प मालाओं और आरती के साथ उनकी अगवानी की गई। संतों की इस टोली के साथ चल रहे अन्य सेवादारों ने बताया कि यह यात्रा पूरी तरह आध्यात्मिक शांति और लोक कल्याण के संकल्प पर आधारित है।

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