रिवाइल्डिंग में प्रशिक्षित नर बाघ अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में भरेगा दहाड़
कान्हा से नौरादेही के लिए रवाना हुआ नया राजा
- रिवाइल्डिंग में प्रशिक्षित नर बाघ अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में भरेगा दहाड़
- पेंच से रेस्क्यू और कान्हा में ट्रेनिंग
- 35 माह का पूर्णत: स्वस्थ बाघ नए ठिकाने के लिए रवाना
- रेडियो कॉलर से होगी निगरानी

मंडला . मप्र के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में आज एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा एक युवा और पूर्णत: प्रशिक्षित नर बाघ को सुरक्षित रूप से वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) के लिए रवाना किया गया। यह स्थानांतरण न केवल बाघों के क्षेत्रीय विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि एक अनाथ शावक के सफल रिवाइल्डिंग की प्रक्रिया का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी है।

जानकारी अनुसार इस नर बाघ को पेंच टाइगर रिजर्व के रूखड़ परिक्षेत्र सिवनी से तब रेस्क्यू किया गया था, जब इसकी उम्र महज 4 से 5 माह थी। उस समय यह शावक असुरक्षित और असहाय था। इसके बाद इसे कान्हा टाइगर रिजर्व के मुक्की स्थित घोरेला रिवाइल्डिंग बाड़ा में लाया गया। यहां विशेषज्ञों की देखरेख में इसे प्राकृतिक शिकार करने और स्वतंत्र रूप से जंगल में विचरण करने का कड़ा प्रशिक्षण दिया गया। लगभग 30 माह के कठिन परिश्रम के बाद वर्तमान में 33 से 35 माह की उम्र का यह बाघ अब पूरी तरह आत्मनिर्भर और स्वस्थ है।

बाघ को सेटेलाईट रेडियों कॉलर पहनाया
स्थानांतरण से पूर्व वन्यप्राणी चिकित्सकों और वैज्ञानिकों द्वारा बाघ को निश्चेत किया गया। इस दौरान उसके शरीर के आवश्यक जैविक मापदंडों का परीक्षण कर उन्हें अभिलेखित किया गया। विशेषज्ञों के परामर्श पर बाघ को सेटेलाईट रेडियों कॉलर पहनाया गया है, जिससे नए आवास में उसकी गतिविधियों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा सकेगी। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 11(1)(ए) के तहत प्राप्त अनुमति और निर्धारित मानक प्रोटोकॉल के अनुरूप इसे वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व भेजा गया है, जहां बाघों का घनत्व कम होने के कारण इसके लिए पर्याप्त आवास और शिकार उपलब्ध है।

कुशल नेतृत्व में हुआ सफल ऑपरेशन
यह पूरी कार्यवाही कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक रवीन्द्र मणि त्रिपाठी के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। इस टीम में उप संचालक (कोर) पुनीत गोयल, उप संचालक (बफर) अमीथा केबी, वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. संदीप अग्रवाल, फील्ड बायोलॉजिस्ट अजिंक्य देशमुख, राज्य वन अनुसंधान संस्थान के डॉ. अनिरूद्ध मजूमदार और भारतीय वन्यजीव संस्थान के रोहन देसाई सहित अन्य विशेषज्ञ एवं कर्मचारी शामिल रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थानांतरण से वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघों की आबादी संतुलित होगी और भविष्य में पारिस्थितिक तंत्र को मजबूती मिलेगी।
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