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श्री सिद्धेश्वर धाम में गूंजा गणपति बप्पा मोरया, भगवान गणेश के जन्मोत्सव पर भक्ति में डूबे श्रद्धालु

 


श्री सिद्धेश्वर धाम में गूंजा गणपति बप्पा मोरया, भगवान गणेश के जन्मोत्सव पर भक्ति में डूबे श्रद्धालु


  • सिद्धेश्वर धाम में संगीतमय श्री गणेश पुराण कथा

  • माता पार्वती को कैसे प्राप्त हुए पुत्र कार्तिकेय, पं. ललित नारायण मिश्रा ने सुनाए प्रसंग


महाराजपुर।  सुरंगदेवरी स्थित प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र श्री सिद्धेश्वर धाम में आयोजित नौ दिवसीय श्री गणेश पुराण कथा के चतुर्थ दिवस पर भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित ललित नारायण मिश्रा ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान श्री गणेश की महिमा और उनके प्राकट्य के प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

कथा के चौथे दिन पंडित ललित नारायण मिश्रा ने भगवान श्री गणेश के जन्मोत्सव का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि माता पार्वती ने अपनी सखी जया और विजया के सुझाव पर अपने शरीर के उबटन से एक बालक की आकृति बनाई और उसमें प्राण फूँके, जो आगे चलकर विघ्नहर्ता श्री गणेश कहलाए। जैसे ही कथा में गणेश जन्म का प्रसंग आया, पूरा पंडाल गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने सोहर और भजनों पर जमकर नृत्य किया।

कथावाचक ने माता पार्वती को पुत्र कार्तिकेय की प्राप्ति की कथा भी विस्तार से सुनाई। उन्होंने बताया कि तारकासुर के अत्याचारों से मुक्ति पाने के लिए देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव और माता पार्वती के तेज से कार्तिकेय का जन्म हुआ। कार्तिकेय के छह मुख होने और कृतिकाओं द्वारा उनका पालन-पोषण किए जाने के वृत्तांत ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा वाचक पंडित ललित नारायण मिश्रा  ने बताया कि गणेश बुद्धि के और कार्तिकेय शक्ति के प्रतीक हैं।



महाभंडारे का आयोजन :

कथा के विश्राम के बाद चतुर्थ दिवस के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। सिद्धेश्वर धाम समिति द्वारा आयोजित इस महाप्रसाद में हजारों श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक भोजन ग्रहण किया। आयोजन को सफल बनाने में धाम के सेवादार और नगर के धर्मप्रेमी बंधु सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।

छटवें दिन होगी श्री गणेश और रिद्धि, सिद्धि का विवाह :

श्री गणेश पुराण के दौरान कथा वाचक पंडित ललित नारायण मिश्रा ने बताया कि कथा के छटवें दिन 3 जनवरी को भगवान श्री गणेश और रिद्धि सिद्ध का विवाह कराया जाएगा। कथा वाचक ने बताया कि जिन युवक, युवतियों के विवाह में अड़चने आ रही है, वे कथा के छटवें दिन शनिवार को तीन-तीन नारियल लेकर श्री गणेश पुराण में आए। 


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