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सिद्धेश्वर धाम में गणेश पुराण कथा के पांचवें दिन उमड़ा जनसैलाब

 


सिद्धेश्वर धाम में गणेश पुराण कथा के पांचवें दिन उमड़ा जनसैलाब

सिन्दूरासुर वध के प्रसंग पर भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

महाराजपुर।

मंडला जिले के सुरंगदेवरी स्थित सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र श्री सिद्धेश्वर धाम में आयोजित नौ दिवसीय श्री गणेश पुराण कथा के पांचवें दिन श्रद्धा, भक्ति और आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। भगवान श्री गणेश के दिव्य चरित्र के श्रवण हेतु हजारों की संख्या में श्रद्धालु कथा पंडाल में उमड़ पड़े।

  • पांचवें दिन की कथा में सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित ललित नारायण मिश्रा ने अपनी ओजस्वी वाणी में सिन्दूरासुर वध और सिन्दूर अर्पण के महत्व का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त कर अहंकारी सिन्दूरासुर ने तीनों लोकों में आतंक मचा दिया था। अंततः भगवान श्री गणेश ने उसका वध कर संसार को भयमुक्त किया। असुर के वध के पश्चात प्रभु का शरीर सिन्दूरी वर्ण का हो गया, तभी से भगवान गणेश को सिन्दूर अत्यंत प्रिय है। कथावाचक ने बताया कि सच्चे मन से सिन्दूर अर्पण करने से भक्तों के सभी विघ्न दूर होते हैं।

कथा के दौरान राजा वरेण्य के प्रसंग ने श्रोताओं को गहरे आत्ममंथन की ओर प्रेरित किया। पंडित ललित नारायण मिश्रा ने बताया कि अज्ञानवश जब राजा वरेण्य ने भगवान को पुत्र रूप में त्याग दिया, तब पश्चाताप और आत्मबोध होने पर भगवान श्री गणेश ने उन्हें गणेश गीता का उपदेश दिया। इस उपदेश के माध्यम से संसार की नश्वरता, निष्काम कर्म और आत्मकल्याण का मार्ग बताया गया, जिससे राजा वरेण्य का उद्धार हुआ।



आरती व महाप्रसाद में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

कथा विश्राम के पश्चात भव्य आरती का आयोजन हुआ, जिसमें पूरा सिद्धेश्वर धाम परिसर “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारों से गूंज उठा। इसके उपरांत सिद्धेश्वर धाम समिति द्वारा विशाल भंडारे एवं महाप्रसाद का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर श्रद्धा भाव से प्रसाद ग्रहण किया।

आयोजन समिति ने बताया कि आगामी दिनों में गणेश पुराण कथा के प्रसंग और भी दिव्य व भव्य रूप में प्रस्तुत किए जाएंगे।

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