शादी के चार दिन बाद ही नर्मदा परिक्रमा पर निकला इंजीनियर जोड़ा
शादी के चार दिन बाद ही नर्मदा परिक्रमा पर निकला इंजीनियर जोड़ा
- निवास अंचल में उमड़ा जनसैलाब
- दादा गुरु के साथ दे रहे पर्यावरण का संदेश
मंडला . नर्मदा के पावन तटों पर अध्यात्म और पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। वर्षों से अन्न का त्याग कर केवल माँ नर्मदा के जल पर जीवित रहने वाले विख्यात संत भैया जी सरकार (दादा गुरु) की नर्मदा परिक्रमा यात्रा इन दिनों निवास अंचल से गुजर रही है। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि नर्मदा को अवैध उत्खनन और प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए एक बड़ा जन-आंदोलन भी बन गई है।

आधुनिक विज्ञान को चुनौती देते हुए दादा गुरु ने वर्षों से अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं किया है। वे केवल नर्मदा जल से प्राप्त ऊर्जा के बल पर निरंतर पदयात्रा कर रहे हैं। दादा गुरु का संकल्प माँ नर्मदा को शुद्ध और अविरल बनाना है। उन्होंने नर्मदा में गिरने वाले गंदे नालों और अवैध उत्खनन के खिलाफ कानूनी लड़ाई भी छेड़ी है। उनकी इस जल-साधना को देख निवास क्षेत्र के ग्रामीण और श्रद्धालु नतमस्तक हैं।
डिंडोरी की ओर बढ़ा कारवां
परिक्रमा के 90 वें दिन यह यात्रा निवास के हाथीतारा पहुँची, जहाँ भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। मंगलवार को बम्हनी और मनेरी होते हुए पहुँची इस यात्रा में लगभग दो हजार भक्त और साधु-संत शामिल हैं। बुधवार को यह कारवां हाथीतारा से प्रस्थान कर बिझौली माता की मढिय़ा में विश्राम के बाद डिंडोरी जिले के शहपुरा (ग्राम बिछिया) में प्रवेश करेगा।

इंजीनियर दंपति ने पेश की अनूठी मिसाल
इस यात्रा में एक विशेष आकर्षण हरदा निवासी 32 वर्षीय सिविल इंजीनियर विशु शर्मा और उनकी पत्नी आध्या हैं। जहाँ आज के युवा विवाह के बाद आधुनिक पर्यटन पर जाते हैं, वहीं इस जोड़े ने 1 नवंबर को विवाह बंधन में बंधने के ठीक चार दिन बाद ही 5 नवंबर से दादा गुरु के सानिध्य में पैदल नर्मदा परिक्रमा शुरू कर दी। पिछले करीब 90 दिनों से यह नवदंपति चकाचौंध से दूर माँ नर्मदा की गोद में पदयात्रा कर रहा है। इनका मानना है कि नए जीवन की शुरुआत के लिए नर्मदा मैया के आशीर्वाद से बढ़कर कुछ भी नहीं है।
पुलिस प्रशासन है मुस्तैद
विशाल जन-समूह और भक्तों की भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा यात्रा का भव्य स्वागत किया जा रहा है और दादा गुरु के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा हुआ है। लोगों के लिए यह एक दुर्लभ अवसर है, जहाँ वे एक ऐसे साधक का सानिध्य प्राप्त कर रहे हैं जो अध्यात्म और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य कर रहे हैं।
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