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मंडला में सेहत का सौदा! मिलावटखोर बेखौफ, जिम्मेदार बेखबर

 


मंडला में सेहत का सौदा! मिलावटखोर बेखौफ, जिम्मेदार बेखबर

  • त्योहार आये, बाजार सजे – पर खाद्य विभाग नदारद! 

मंडला - जिले में इन दिनों मिठाइयों, पनीर और दूध से बने उत्पादों की बाढ़ आई हुई है। होटल, ढाबे और मिठाई दुकानें क्विंटलों के हिसाब से माल बेच रही हैं। हर गली, हर चौराहे पर रंग-बिरंगी मिठाइयाँ सजी हैं।

लेकिन सवाल सीधा है—

क्या मंडला में वाकई इतना दूध और खोवा पैदा होता है, जो इतनी भारी खपत को पूरा कर सके?

जवाब हर समझदार नागरिक जानता है—नहीं!

बाहर से आ रहा पनीर, खोवा और दूध से बने संदिग्ध उत्पाद मंडला के बाजारों में धड़ल्ले से खपाए जा रहे हैं। हाल ही में दूसरे जिलों में नकली मावा-पनीर की खेप पकड़ी गई है। ऐसे में यह आशंका और गहरी हो जाती है कि वही “जहर” मंडला की थालियों तक भी तो नहीं पहुँच रहा?

और इसी बीच…

खाद्य एवं औषधि विभाग मानो गहरी नींद में सोया हुआ है।

त्योहार से पहले कितने होटल जांचे गए?

कितनी मिठाई दुकानों से सैम्पल लिए गए?

कितने सैम्पल फेल हुए?

किस पर कार्रवाई हुई?

इन सवालों का जवाब न जनता को मिलता है, न ही कहीं सार्वजनिक रूप से दिखाई देता है। कभी-कभार विभाग मैदान में दिखता जरूर है, सैम्पल भी लेता है—लेकिन उन सैम्पलों का अंजाम रहस्य बनकर रह जाता है। रिपोर्ट कहाँ जाती है? फाइलों में दब जाती है या मिलावटखोरों तक पहले पहुँच जाती है?

त्योहार वही समय होता है जब मिलावट सबसे ज्यादा होती है और जांच सबसे सख्त होनी चाहिए। लेकिन मंडला में उल्टा होता दिख रहा है—

मिलावटखोर बेखौफ हैं, और जिम्मेदार बेपरवाह।

यह सिर्फ लापरवाही नहीं, यह सीधे-सीधे जनता की सेहत से खिलवाड़ है।

बच्चे, बुजुर्ग, बीमार—सब वही मिठाई खा रहे हैं, वही पनीर, वही दूध पी रहे हैं, जिनकी शुद्धता पर सवाल खड़े हैं।

जागो जिम्मेदारों, जागो!

फिर त्योहार आ गया है।

अब तो बाहर निकलो—होटल, ढाबे, मिठाई दुकानें खंगालो।

सैम्पल लो, रिपोर्ट सार्वजनिक करो और दोषियों पर कार्रवाई करो।

वरना एक दिन यह सवाल पूरे शहर की आवाज बन जाएगा—

“जब मंडला की सेहत बिक रही थी, तब खाद्य एवं औषधि विभाग कहाँ था?”

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