जैन मंदिर निर्माण के दौरान दीवार गिरने से हादसा
जैन मंदिर निर्माण के दौरान दीवार गिरने से हादसा
- मजदूर पति-पत्नी गंभीर, सिवनी रेफर
- सिस्टम वेंटिलेटर पर, निर्दोष मजदूर ऑक्सीजन पर – दोष किसका?
नैनपुर (मंडला)।
नैनपुर थाना क्षेत्र के बुधवारी बाजार में बुधवार दोपहर करीब 12 बजे बड़ा हादसा होते-होते टल गया। जैन मंदिर निर्माण स्थल के पास अचानक दीवार भरभराकर गिर गई, जिसकी चपेट में आए मजदूर पति-पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गए।
घायल मजदूरों की पहचान रघुवीर भूरिया (26) एवं उनकी पत्नी रेखा भूरिया (24), निवासी ग्राम जामगांव, थाना नैनपुर के रूप में हुई है। दोनों सब्जी खरीदी-बिक्री के दौरान निर्माण स्थल के समीप मौजूद थे। हादसे के बाद उन्हें सिविल अस्पताल नैनपुर में प्राथमिक उपचार दिया गया, जहां से जैन मंदिर समिति की ओर से दोनों को सिवनी रेफर किया गया है। बताया जा रहा है कि एक की हालत गंभीर है।
डेंजर ज़ोन में चल रहा बाजार और निर्माण
बुधवारी बाजार का पूरा इलाका अव्यवस्था का शिकार है।
एक ओर निर्माणाधीन जैन मंदिर,
दूसरी ओर घरों व चबूतरों पर कब्ज़ा,
सड़क पर अवैध दुकानें,
और बीच में रोज़मर्रा का बाजार—
यह पूरा क्षेत्र लंबे समय से डेंजर ज़ोन बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका परिषद नैनपुर और ठेकेदार के पास न कोई ठोस प्लान है, न सुरक्षा व्यवस्था। मूलभूत सुविधाएं नदारद हैं, लेकिन बाजार वसूली नियमित चल रही है।
आग लग जाए तो फायर ब्रिगेड भी नहीं घुस पाए
बुधवारी बाजार की हालत इतनी बदतर है कि यदि किसी दिन आग लग जाए तो फायर ब्रिगेड तो दूर, ऑटो तक अंदर नहीं जा सकता।
आरोप है कि:
रातों-रात दुकानें बिक गईं,
सड़क पर स्थायी कब्जे हो गए,
गरीबों के ठेले हटाए जाते हैं,
जबकि पक्के अवैध निर्माण धड़ल्ले से हो रहे हैं।
तहसीलदार ने संभाला मोर्चा
घटना की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से ग्राउंड जीरो रिपोर्टिंग के बाद सामने आई, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया।
तहसीलदार नैनपुर हरि सिंह धुर्वे मौके पर पहुंचे और सिविल अस्पताल में घायल मजदूर दंपती से मुलाकात की।
तहसीलदार ने भी माना कि:
“बुधवारी बाजार अव्यवस्थित है। सड़क पर दुकानें लगाना और चबूतरे बनाना गलत है। एक निश्चित प्लान बनाकर मैदानी स्तर पर कार्रवाई की जाएगी।”
हालांकि, घायल मजदूरों की गंभीर हालत के चलते पुलिस बयान भी दर्ज नहीं हो सके।
हटाए गए, फिर जम गए – सिस्टम फेल?
प्रशासन और नगर पालिका द्वारा मौके पर दुकानदारों को हटाकर समझाइश दी गई। चेतावनी दी गई कि दोबारा कब्जा करने पर जब्ती होगी।
लेकिन महज़ एक घंटे बाद बाजार फिर से पहले जैसा हो गया।
सवाल उठता है—
यह बेफिक्री है?
मजबूरी?
प्रशासन की शह?
या पूरा सिस्टम फेल?
उठते सवाल
पूर्व और वर्तमान नगर पालिका ने सिर्फ आर्थिक पक्ष क्यों देखा?
क्या बड़ी घटना के बाद ही प्रशासन जागेगा?
क्या मजदूरों की जान की कोई कीमत नहीं?
कलेक्टर से मदद की मांग
घटना ने एक बार फिर चेतावनी दे दी है। यदि अब भी नहीं चेते तो भविष्य में और बड़ी दुर्घटना तय है।
जिला प्रशासन मंडला और कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा से मांग की जा रही है कि घायल मजदूर पति-पत्नी को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
दो जून की रोटी कमाने आए मजदूर आज अव्यवस्था और लापरवाही का शिकार हो गए हैं।
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