रेत से भरे ट्रैक्टर ने बुझाया घर का चिराग
रेत से भरे ट्रैक्टर ने बुझाया घर का चिराग
13 दिन बाद, लाखों के इलाज के बाद सुरेंद्र कफ़न में घर लौटा
नैनपुर
रेत के अवैध खेल ने एक और परिवार को उजाड़ दिया। विकासखंड नैनपुर के लखमा डुंगरिया निवासी मात्र 20 वर्षीय सुरेंद्र उइके की दर्दनाक मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। 13 दिन तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद, निजी अस्पताल में लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद सुरेंद्र जिंदगी की जंग हार गया और आखिरकार कफन में अपने घर पहुंचा।
हीरापुर में पलटा रेत से भरा ट्रैक्टर, तीन लोग हुए थे घायल
13 जनवरी को पिंडरई–नैनपुर सड़क मार्ग पर बेलगाम रेत से भरे ट्रैक्टर ने सुरेंद्र उइके, उसके पिता मुन्नालाल उइके और एक युवती को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर के बाद ट्रैक्टर पलट गया। तीनों को गंभीर हालत में पहले सिविल अस्पताल नैनपुर, फिर जबलपुर रेफर किया गया।
जहां सुरेंद्र की हालत लगातार बिगड़ती चली गई, वहीं उसके पिता मुन्नालाल उइके सिर में गंभीर चोट लगने के बाद मानसिक रूप से अस्वस्थ हो गए हैं और असमंजस भरी बातें कर रहे हैं। हादसे में घायल 23 वर्षीय सर्वंती मरावी पिता सुखचेन मरावी का इलाज जारी है।
जबलपुर से नागपुर ले जाते समय तोड़ा दम
जब जबलपुर के डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए, तो परिजन सुरेंद्र को नागपुर ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही 20 साल के युवक ने दम तोड़ दिया। सिविल अस्पताल नैनपुर में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
उम्र 20 साल… पीछे छूट गई पत्नी और 2 साल की मासूम
सुरेंद्र की उम्र महज 20 साल थी। घर में जवान पत्नी और 2 साल की मासूम बच्ची है, जिनके सिर से हमेशा के लिए पिता का साया उठ गया। रेत के इस खूनी खेल ने एक परिवार की पूरी दुनिया उजाड़ दी।
रेत के खेल में अब सड़कें लाल, बहनों का सिंदूर उजड़ रहा
रेत माफिया के बेलगाम ट्रैक्टर और डंफर अब सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे हैं। टोकन चिपके ट्रैक्टर, बिना नंबर, बिना बीमा, बिना रॉयल्टी के फर्राटा भरते हुए कानून-व्यवस्था का मजाक उड़ा रहे हैं। आम नागरिकों के लिए सड़क पर चलना दूभर हो गया है।
घटना के बाद इलाज के नाम पर मेडिकल कॉलेज से लेकर निजी अस्पतालों तक परिजन दौड़ते हैं, घर के जेवर गिरवी रखते हैं, लेकिन अंत में घर सिर्फ लाश ही पहुंचती है।
वन विभाग दृष्टि होते हुए भी धृतराष्ट्र बना
विकासखंड नैनपुर के ग्राम पंचायत कामता के पास बोनस की रेत ढाबा के सामने जंगल के अंदर वन विभाग की जमीन को खोखला कर खुलेआम रेत निकाली जा रही है। रोजाना 100 से अधिक ट्रैक्टर जंगल से रेत निकालकर हर दिशा में दौड़ रहे हैं, लेकिन वन विभाग सब कुछ देखते हुए भी आंखें मूंदे बैठा है।
राजस्व, पुलिस, थाना–चौकी और खनिज विभाग की मिलीभगत से सरकारी खजाने की लूट जारी है, और बदले में जनता की लाशें उनके घर पहुंच रही हैं।
जिला प्रशासन, पुलिस और खनिज विभाग पर सीधे आरोप
इस पूरे रेत के खेल में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और खनिज विभाग की कार्यवाही न होने पर सीधे आरोप लग रहे हैं। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी भी इस मुद्दे को लेकर उग्र है। मंडला के उच्च अधिकारियों पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
यह सवाल भी उठ रहा है कि जब यह प्रदेश की कैबिनेट मंत्री श्रीमती संपत्तियां उइके का गृह जिला है, तो फिर रेत चोरों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं?
अब भी नहीं चेता प्रशासन, तो और लाशें तय
रेत, जुआ, अवैध शराब और अवैध खनन माफिया इस कदर हावी हो चुके हैं कि प्रशासन बौना नजर आ रहा है। प्रभावी और कठोर कार्रवाई अब समय की मांग है, नहीं तो यह चुप्पी और चूक आने वाले चुनावी दौर में भारी पड़ सकती है।
गांव के गांव अवैध धंधों से बर्बाद हो रहे हैं। यह आग के ढेर में दबी चिंगारी है, जो कभी भी विकराल रूप ले सकती है।
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