इतिहास और पहचान बचाने गढ़ा मंडला पहुँचेगी गोंडवाना की आवाज़
इतिहास और पहचान बचाने गढ़ा मंडला पहुँचेगी गोंडवाना की आवाज़,
6 जनवरी को शांतिपूर्ण आंदोलन का आह्वान
मंडला। गढ़ा मंडला के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अस्तित्व को बचाने के लिए गोंडवाना समाज से जुड़ी एक बड़ी आवाज़ 6 जनवरी को गढ़ा मंडला पहुँचने जा रही है। आंदोलन का उद्देश्य गढ़ा मंडला के नाम, इतिहास और आदिवासी पहचान से कथित छेड़छाड़ के खिलाफ शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराना है।
आंदोलन से जुड़े वक्ताओं का कहना है कि गढ़ा मंडला केवल एक भौगोलिक नाम नहीं, बल्कि गोंडवाना की अस्मिता, स्वाभिमान और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। हाल के दिनों में नाम परिवर्तन और ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ की आशंकाओं ने आदिवासी समाज में गहरा असंतोष पैदा किया है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं वक्ता ने कहा कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है, बल्कि उन नीतियों और प्रयासों के खिलाफ है जो गोंडवाना की पहचान को कमजोर करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक चुप्पी और सत्ता की हठधर्मिता मिलकर आदिवासी इतिहास को धुंधला करने की कोशिश कर रही है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि गढ़ा मंडला की धरती सदैव अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की साक्षी रही है और आज एक बार फिर जनता को अपने इतिहास और पहचान की रक्षा के लिए एकजुट होना होगा।
आयोजकों ने 6 जनवरी को गढ़ा मंडला पहुँचकर शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और अनुशासित तरीके से अपनी बात रखने की अपील की है। उन्होंने सभी समाजों से मतभेद भुलाकर एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि जब जनता संगठित होकर खड़ी होती है, तब सत्ता को सुनना पड़ता है।
आंदोलन का मुख्य संदेश स्पष्ट है—
गढ़ा मंडला का इतिहास बदला नहीं जा सकता और गोंडवाना की पहचान से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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