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खेती गई पानी में, भविष्य गया अंधेरे में”—पांगरी बांध को लेकर किसानों का उग्र आंदोलन

खेती गई पानी में, भविष्य गया अंधेरे में”—पांगरी बांध को लेकर किसानों का उग्र आंदोलन 
 सवालों के कटघरे में शासन-प्रशासन: पांगरी बांध से उजड़ा किसान, न्याय के लिए सड़क पर उतरा 
बुरहानपुर जिले की पांगरी परियोजना बांध आज किसानों के लिए विकास नहीं, बल्कि विनाश का प्रतीक बनती जा रही है। बांध के डूब क्षेत्र में सैकड़ों किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है, जिससे किसानों की वर्षों की मेहनत और आजीविका एक झटके में खत्म हो गई। गंभीर बात यह है कि भूमि डूबने के बावजूद किसानों को अब तक शासकीय नियमों के अनुरूप मुआवजा नहीं दिया गया है।
इसी आक्रोश के चलते बड़ी संख्या में किसान नेपानगर एसडीएम कार्यालय पहुंचे और जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए कार्यालय का घेराव किया। किसानों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर तत्काल न्याय और मुआवजे की मांग की। प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि जमीन डूबने से वे बेघर होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। बच्चों की पढ़ाई, परिवार का भरण-पोषण और भविष्य की चिंता ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे डॉ. रवि कुमार ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भू-अर्जन प्रक्रिया के तहत धारा 11 की प्रारंभिक सूचना पहले ही जारी की जानी चाहिए थी, लेकिन प्रशासन अब देर से प्रक्रिया शुरू कर रहा है, जो पूरी तरह नियमों के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शासकीय मापदंडों के अनुसार मुआवजा नहीं दिया जा रहा, जिससे किसानों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ा।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द उचित मुआवजा और लिखित आश्वासन नहीं मिला तो आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा। पांगरी बांध को लेकर उठा यह किसान आंदोलन अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है और आने वाले दिनों में इसका असर जिले की कानून-व्यवस्था और राजनीति पर भी पड़ सकता है।

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