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आजादी के 77 साल बाद भी स्कूल नहीं! कच्चे मकान में पढ़ने को मजबूर 150 बच्चे, सिस्टम पर बड़ा सवाल

नेपानगर थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत मांडवा के बोमलियापाठ में स्कूल नहीं होने से बच्चे कच्चे मकान में बैठकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं जिससे कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को काफ़ी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।

इधर नेपानगर जयस ब्लॉक अध्यक्ष मास्टर रावत ने बताया है कि आजादी के 77 साल बाद भी बोमलियापाठ में सरकारी स्कूल तक नहीं बनी हुई है।

 जिससे कि हमारे ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे पढ़ाई से वंचित रह रहे है। 

रावत ने बताया है कि यहां पर रोजाना 100 से 150 बच्चे कच्चे मकान में बैठकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। हमने शासन प्रशासन को स्कूल के बारे में कई बार अवगत करा चुके हैं लेकिन अभी तक उनके द्वारा कोई भी निराकरण नहीं किया गया है। 

मास्टर रावत ने बताया है कि हमारे वन ग्राम मांडवा में पदस्थ वनरक्षक कमलेश रघुवंशी भी इन दिनों काफी चर्चाओं में बने हुवे हैं उनके द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के अशिक्षित बच्चों को शिक्षित करने के लिए कई अलग अलग प्रकार की मुहिम चलाई जा रही है। 

उनके द्वारा बोमलियापाठ कि सीमा पिता दला नाम की लड़की को प्रतिमाह 3 हजार रुपए पढ़ाई करने के लिए दिए जा रहे है। उनके द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल खोलकर ओर अपने ही पैसों से शिक्षक नियुक्त कर बच्चों को शिक्षित करने में लगे हुवे हैं तथा आज 26 जनवरी को उनके द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के 100 से 150 बच्चों को ठंड से बचने के लिए स्वेटर वितरण का कार्य किया गया। 

जो कि एक बहुत ही बढ़िया सराहनीय कार्य है। नेपानगर जयस ब्लॉक अध्यक्ष मास्टर रावत ने बताया है कि शासन प्रशासन इस मामले को तत्काल संज्ञान में लेकर बोमलियापाठ में स्कूल निर्माण कार्य शुरू करवाए जिससे को ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को पढ़ाई करने में आसानी होगी।

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