कान्हा के 127 बारासिंगा सतपुडा में कर रहे चहल कदमी
कान्हा के 127 बारासिंगा सतपुडा में कर रहे चहल कदमी
कान्हा के बारासिंगा सतपुडा टायगर रिजर्व में करेंगे चहल कदमी
- कान्हा से सतपुडा पार्क भेजे गए 12 बारासिंगा
- अब तक 127 बारासिंगा को भेजा जा चुके सतपुड़ा
- कान्हा में ही विलुप्त प्रजाति के बारासिंगा

मंडला . कान्हा टायगर रिजर्व के बारासिंघा को प्रदेश के अन्य नेशनल पार्कों में आबाद करने के उद्देश्य से इन्हें सफलतापूर्वक स्थानातंरण किया जा रहा है। बारासिंगा विश्व की अति संकटग्रस्त प्रजाति है। एक समय कड़ी भूमि (हार्ड ग्राउंड) का बारासिंघा सिर्फ कान्हा नेशनल पार्क में ही शेष रह गए थे। इस प्रजाति के विलुप्त होने की आशंका और बचाव के उद्देश्य से 2015 में इनको अन्य नेशनल पार्कों में आबाद करने की कार्ययोजना बनाई गई। जिसके बाद कान्हा से बारासिंघा का ट्रांसलोकेशन किया जा रहा है। अभी तक बारासिंघा को कान्हा से बांधवगढ़, सतपुड़ा और वन विहार भोपाल शिफ्ट किया गया है।

बताया गया कि 17 जनवरी को कान्हा नेशनल पार्क से सतपुड़ा टायगर रिजर्व नर्मदापुरम के लिए 12 बारासिंगा भेजे गए है। यह पूरा अभियान क्षेत्र संचालक रवीन्द्र मणि त्रिपाठी के कुशल नेतृत्व में संपन्न हुआ। इस दौरान कान्हा प्रबंधन की पूरी टीम मुस्तैद रही, जिसमें उप संचालक पुनीत गोयल, वन्यजीव चिकित्सक डॉ. संदीप अंग्रवाल, डॉ. आरके चतुर्वेदी, सहायक संचालक बंजर, परिक्षेत्र अधिकारी सरही एवं अन्य वनकर्मियों का सराहनीय योगदान रहा।


जानकारी अनुसार प्रदेश का राजकीय पशु बारहसिंघा कान्हा नेशनल पार्क में आबाद है। कान्हा में ही विलुप्त प्रजाति मौजूद है। यहां करीब 1100 की संख्या में बारासिंगा है। बारहसिंघा की प्रजाति को प्रदेश के अन्य नेशनल पार्क में बसाया जा रहा है। बारासिंगा की प्रजाति के विलुप्त होने की आशंका को देखते हुए प्रदेश के अन्य नेशनल पार्कों में इन्हें आबाद करने के उद्देश्य से वर्ष 2015 में कार्य योजना बनाई गई, जिसके बाद कान्हा से बारासिंगा का ट्रांसलोकेशन किया जा रहा है। बारासिंघा को आबाद करने के उद्देश्य से सतपुड़ा टायगर रिजर्व में बसाने की तैयारी वर्ष 2015 से चल रही है। इसके लिए मंडला के कान्हा नेशनल पार्क के सरही परिक्षेत्र स्थित सौंफ मैदान से 12 बारासिंगा (04 शावक एवं 08 मादा) को सफलता पूर्वक केप्चर कर विशेष वाहन से सतपुड़ा टायगर रिजर्व की ओर रवाना किया गया। जहां उन्हें विशेष रूप से बनाए गए बाड़े में छोड़ा जाएगा।

कान्हा से अभी तक 182 बारासिंघा हुए शिफ्ट
बताया गया कि सतपुड़ा टायगर रिजर्व में बारासिंघा को आबाद करने के लिए शासन द्वारा दिए गए आदेशानुसार बारासिंघा भेजने का प्लान है। जिसमें 12 शिफ्ट में अभी तक 127 बारासिंगा सतपुड़ा टायगर रिजर्व नर्मदापुरम भेजे जा चुके है। इन बारासिंगा को कान्हा टायगर रिजर्व समेत सरही परिक्षेत्र से सफलता पूर्वक कैप्चर किया गया। इसके साथ ही अभी तक कान्हा से वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भोपाल में 07 बारासिंगा और बांधवगढ़ टाईगर रिजिर्व उमरिया में अभी तक 48 मध्य भारतीय हार्ड ग्राउंड बारासिंगा शिफ्ट किये गये है। प्रदेश के नेशनल में पार्क को बारासिंगा से आबाद करने का प्लान है। जिसके चलते बारासिंघा की कान्हा से शिफ्टिंग की जा रही है। अभी तक बाधवगढ़, वन विहार भोपाल और सतपुड़ा टायगर रिजर्व में 182 बारासिंघा भेजे जा चुके है।

ऐसे किया गया बारहसिंघा को बोमा से कैप्चर
बताया गया कि हिरण और बारासिंगा बेहद नाजुक वन्य प्राणी होते हैं। जिन्हें पकडऩा या टेंक्यूलाइज करना खतरे से खाली नहीं होता। जिसके कारण बारासिंगा को बिना हाथ लगाए और बेहोश किए कैप्चर करने का प्रयास किया जाता है। इसके लिए वाई के आकार का एक अपारदर्शी बाड़ा तैयार किया जाता है, जिसका एक हिस्सा काफी चौड़ा और सामने से खुला होता है, वहीं दूसरा हिस्सा पतली गली सा होता है। पतली गली वाले हिस्से के मुहाने पर उस वाहन को लगा दिया जाता है जिसमें बारासिंगा परिवहन किए जाने हैं। बाड़े के चौड़े वाले खुले हिस्से से बारासिंगा अंदर प्रवेश कर जाते हैं और फिर उन्हें हांककर पतली गली वाले हिस्से की तरफ ले जाया जाता है, जिसके मुहाने पर खड़े वाहन में बारासिंगा सवार हो जाते हैं।

बारासिंगा की घटती संख्या को बढ़ाने का प्रयास
बताया गया कि प्रदेश में कान्हा नेशनल पार्क ही हार्ड ग्राउंड बारासिंगा की बड़ी संख्या में प्रजाति थी लेकिन सन 1970 तक बारहसिंघा की संख्या कम हो गई। यहां सिर्फ 68 बारासिंगा बचे थे। कान्हा प्रबंधन द्वारा बेहतर संरक्षण के चलते अब कान्हा में इनकी संख्या लगभग 1100 तक हो गई है। इसके बाद बारासिंगा की संख्या बढ़ाने के लिए कार्य योजना बनाई गई। यहां बारासिंगा को बाड़े में रखा गया। इसके बाद विशेष देख रेख की गई। यहां के स्थाईकर्मी जोधा सिंह का बारहसिंघा की प्रजाति बढ़ाने में विशेष योगदान रहा। बारहसिंघा का कुनबा बढ़ाने के लिए यहां के करीब 250 अजगर बाड़े से बाहर निकाले गए, जिसके बाद बारहसिंघा की संख्या बढऩे लगी। अब कान्हा में बारहसिंघा की संख्या करीब 1100 के आसपास है। यहां के अलावा अब प्रदेश के दूसरे पार्कों में भी बारासिंगा की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी के चलते अब बांधवगढ़ पार्क में भी बारासिंगा को भेजने की कार्ययोजना शुरू हो गई है, जिसके बाद बांधवगढ़ पार्क में भी पर्यटकों को बारासिंगा के दीदार होंगे।
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