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33 परिवारों में लौटी मुस्कान

 

33 परिवारों में लौटी मुस्कान  

  • मंडला पुलिस ने ऑपरेशन मुस्कान में 33 नाबालिगों को खोज निकाला
  • 9 राज्यों से दस्तयाबी, 49 हजार छात्र-छात्राएं जागरूकता कार्यक्रम से लाभान्वित

मंडला . पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर विगत माह प्रदेश भर में चलाए गए विशेष अभियान ऑपरेशन मुस्कान के तहत मंडला पुलिस ने एक बड़ी मानवीय उपलब्धि हासिल की है। पुलिस अधीक्षक मंडला रजत सकलेचा के नेतृत्व और मार्गदर्शन में जिले से गुम हुए 33 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित खोजकर उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। इन बच्चों में 29 बालिकाएँ और 4 बालक शामिल थे, जिनकी सुरक्षित घर वापसी से 33 परिवारों में खुशियाँ लौट आई हैं।

बताया गया कि इस अभियान की शुरुआत पुलिस अधीक्षक मंडला द्वारा पीएम श्री कन्या विद्यालय महाराजपुर से की गई थी। इस सफल कार्रवाई में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शिव कुमार वर्मा, समस्त अनुविभागीय अधिकारी पुलिस, उप पुलिस अधीक्षक महिला सुरक्षा, और सभी थाना, चौकी प्रभारियों सहित गठित विशेष टीमों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस टीमों ने बच्चों को खोजने के लिए परिजनों से लगातार संपर्क बनाए रखा और दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, ओडिशा समेत मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों की पुलिस से सहयोग प्राप्त कर बच्चों को सुरक्षित दस्तयाब किया।

छात्र-छात्राओं से संवाद कर किया जागरूकता 

ऑपरेशन मुस्कान के साथ मंडला पुलिस ने जिले में व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाया। पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा स्वयं सीएम राइज स्कूल बिछिया, कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पडरिया, एकलव्य विद्यालय सिझौरा, पीएम श्री रानी अवंती विद्यालय मंडला और पीएम श्री कन्या विद्यालय महाराजपुर जैसे संस्थानों में पहुँचे। उन्होंने छात्र-छात्राओं के साथ सीधे संवाद स्थापित किया और उन्हें बाल विवाह, लैंगिक समानता, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जागरूक किया। इस दौरान हेल्पलाइन 112, 1098 और 1930 के उपयोग के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही, नशा उन्मूलन और करियर मार्गदर्शन जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई।

व्यापक जागरूकता का दिखा प्रभाव 

अभियान के दौरान पुलिस अधिकारियों द्वारा जिले के कुल 252 विद्यालयों और महाविद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों से लगभग 49 हजार छात्र-छात्राएँ, शिक्षकगण, कर्मचारी और आमजन लाभान्वित हुए। जागरूकता का यह अभियान सार्वजनिक स्थलों जैसे बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, मड़ई और मेलों पर भी चलाया गया, जिससे समाज में सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।



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