सत्साहित्य का स्वाध्याय व्यक्ति निर्माण का है मुख्य आधार
वर्तमान समय में मनुष्य के विकृत विचारों के कारण व्यक्ति, परिवार, समाज व राष्ट्र के साथ पूरी दुनिया कई समस्याओं व विभिषिकाओं का सामना कर रही है। इसके कारण कीमती मानवीय काया बर्बाद होती जा रही है। गायत्री परिवार के संस्थापक युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने मानव में देवत्व के जागरण व धरती पर स्वर्ग के अवतरण के लिए सत्साहित्य की 3 हजार 200 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया, जो जीवंत देव प्रतिमाओं के समान है। इनके स्वाध्याय से जन-जन में शिक्षा व ज्ञान का आलोक फैलकर व्यक्ति का अंतःकरण परिष्कृत होने से ईश्वरीय कार्यों की ओर जुड़ता है।
स्थानीय गायत्री शक्तिपीठ पर शांतिकुंज हरिद्वार के प्रतिनिधि योगेंद्र गिरि ने गायत्री साहित्य विस्तार पटल की शुरुआत करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा- शक्तिपीठ सिर्फ पूजा पाठ तक ही सीमित नहीं होने चाहिए। जनजागरण के केंद्र बनने चाहिए। इससे सनातन संस्कृति के संस्कारों का प्रचार प्रसार हो सके। सत्साहित्य के स्वाध्याय से ही व्यक्ति का निर्माण संभव है। व्यक्ति के निर्माण से परिवार, समाज, राष्ट्र व विश्व में ज्ञान का आलोक फैलेगा। विधायक सचिन बिरला ने गायत्री शक्तिपीठ के विस्तार के लिए एनटीपीसी से 20 लाख रुपए स्वीकृत कराने की बात कही। पूर्व विधायक हितेंद्रसिंह सोलंकी के साथ एनटीपीसी के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की जाएगी।
गायत्री परिवार : पटल की स्थापना का मुख्य उद्देश्य आचार्यजी का साहित्य उपलब्ध कराना
गायत्री परिवार इंदौर उपझोन समन्वक व सेवानिवृत्त प्राचार्य श्रीकृष्ण शर्मा व उज्जैन उपझोन समन्वयक राजेश पटेल ने व्यक्ति निर्माण व परिवार निर्माण में सत्साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में बताया। वरिष्ठ गायत्री साधक रवींद्र दुबे ने कहा- पटल की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य समाज को आचार्यजी का सत्साहित्य सुलभ कराना है। यह पटल आचार्यजी की विचार क्रांति का एक प्रकल्प है। गायत्री साहित्य विस्तार पटल पर स्वास्थ्यवर्धक आयुर्वेदिक औषधियां, यज्ञ हवन सामग्री उपलब्ध रहेगी। पूर्व सांसद ताराचंद पटेल, पूर्व विधायक जगदीश मोरण्या, पूर्व नपाध्यक्ष रामचरण कुशवाह व नरेंद्र शर्मा ने संबोधित किया। डॉ. केके श्रीवास्तव ने विभिन्न गायत्री शक्तिपीठों के प्रमुखों को तुलसी के पौधे वितरित किए। तहसील स्तरीय कार्यकर्ता गोष्ठी का आयोजन किया। इस दौरान नवलसिंह पंवार, रामलखन पाल, लक्ष्मण पटेल, जगदीश शाह, शिवनारायण परवाल, डाॅ. गजानन वर्मा सहित गायत्री परिजन उपस्थित थे।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/khandwa/khargone/news/self-cultivation-of-sanskriti-is-the-main-basis-of-creation-128060554.html
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