संदल चादर चढ़ाकर किया लंगर का आयोजन, भक्ति में झूमे श्रद्धालु
शहर की पीरानपीर टेकड़ी पर हर साल होने वाले मेले का आयोजन इस बार नहीं किया गया। मेले में हर साल महफिले रंग का आयोजन होता है। इसमें बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इसे लेकर रविवार को बाबा पीरानपीर दरगाह पर महफिले रंग का आयोजन हुआ। इसमें राजस्थान कोटा के प्रसिद्ध कव्वाल हिफ्जुर्रहमान हकीमी साहब ने अपने सूफिया कलामों से अकीदत के नजराने पेश किए। उन्होंने कहा- मैं कादरी हूं, शुक्र है रब्बे कदिर का, दामन हैं मेरे हाथ में पीरानपीर का, ये तेरा करम शाहे जमाल में क्या था और क्या हो गया... जैसे सूफियाना कलाम पर श्रोता झूम उठे। कव्वाल को नजराने दिए गए। कोरोना संक्रमण के चलते इस साल मेले का आयोजन नहीं होने पर हर साल होने वाले आयोजन खादिम कमेटी की जानिब से किए गए। इसमें महफिले रंग, संदल चादर व लंगर का आयोजन हुआ। शाम 4.30 बजे तक रंग की महफिल सजी। इसके बाद संदल चादर के साथ कुल की फातिया हुई। इसमें सुख समृद्धि व खुशहाली की सामूहिक दुआ की गई। शाम 5 बजे से लंगर का आयोजन हुआ। कव्वाल हिफ्जुर्रहमान हकीमी साहब कोटा ने बताया हजरत अमीर खुसरो ने रंग की महफिल की शुरुआत की है। यह दरगाहों आस्ताने खानकाहों में पड़ी जाने वाली भक्ति रचनाएं होती है। जो निस्बत से ताल्लुक रखती है। सनावद अमन की नगरी है ओर यहां आना मेरे लिए खुशकिस्मती की बात है। इस पर आस्ताने को फूलों से खूबसूरती से सजाया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि हीरू काका देवाणी, प्रभात उपाध्याय, हाजी इलियास इंदौर, इकबाल भाई उज्जैन, मस्तान इंदौर सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/khandwa/khargone/news/anchor-organized-by-offering-sandal-sheet-devotees-walk-in-devotion-128060572.html
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