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धर्म के फल की ईच्‍छा हर कोई चाहता है मगर धर्म कोई नही करना चाहता है ।पाप के



बुरहानपुर:- (राजूसिंघ राठौड)धर्म के फल की ईच्‍छा हर कोई चाहता है मगर धर्म कोई नही करना चाहता है ।पाप के फल की ईच्‍छा कोई नही चाहता है मगर पाप करता ही रहता है। उसमे से निकलता ही नही और फसता ही जाता है।और निकलता ही नही।सबसे अच्‍छी बात यहा है की मंदिर पुर्ण नही होता जब तक उसमे मास्‍तंभ ना हो। समाज भी तब पुर्ण होता है जब तक उसमे बुजूर्ग ना हो। आचार्य भी दो प्रकार के होते एक आचार्य परमेष्‍ठी जो पूरे समाज का , संत का, मंदिर के सुख दुःख का जैन समाज का निर्माण करे। दुसरे आचार्य वे होते जो समाज के कार्य मर्यादा मे कर सकते , 








शिलान्‍यास, पंचकल्‍याणक , धार्मिक कार्य पंडित व्‍दारा किया जाता है। दो ज्ञानियो से हमेशा बच कर रहना चाहिए । जो ज्यादा ज्ञानी है वह वही करता जो सोच लिया, किस की नही सुनता है। दुसरे जिसे कम ज्ञान सोचता नही कर बैठता है, वह येसे दिखाता है जैसे उसके जैसा ज्ञानी नही है। वर्तमान काल मे जी रहा है उसे अपना भुतकाल व भविष्य काल नही भुलना चाहिए ।






ये उदबोधन प्रथम बार बुरहानपुर चातुर्मास हेतु पधारे श्रमण मुनि प्रणुत सागर महाराज ने कहे। श्रमण मुनि साध्‍य सागर महाराज ने कहा कि राजपुरा जैन मंदिर को समोशरण है। केशलोचन करते देखकर मन विभोर हो जाता है। जिनालय मे मन को शांति मिलती है। विशुध्‍दी से ही मेरा कल्याण हो  सकता है। जैन कुल मे जन्म लेने वाले के हाथ मे शास्‍त्र ही रहता है। दिगंबर जैन मुनि समाज की धरोहर है। मुनि सेवा समिति के संयोजक नितिन जैन ने बताया की मुनिसंघ का आगमन जैनाबाद से पैदल विहार कर राजघाट से बाई साहब की हवेली, फव्‍वारा चौक, गांधी चौक, पांडुमल चौराहा, होते हुए राजपुरा स्‍थित 





श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर मे हुआ। मार्ग मे समाज जन व्‍दारा पाद पक्षालन किया गया।मंदिर मे मुलनायक शांतिनाथ भगवान पंचामॄत अभिषेक किया गया। मंगलाचरण गोरव गंगवाल, विपीन लुहाडिया ने किया। मुनिसंघ की आहारचर्या विनयचंद जैन,  सुमेरचंद बडजात्‍या निरंतराय हुई। दोपहर 2:30 बजे संगीतमय आचार्य विशुद्ध सागर महाराज की गई।आलोक पाटोदी, रिना गंगवाल ने पुजा गाकर भक्‍तिमय कर दिया। 3 जुलाई को सुबह 5:30 बजे आचार्य भक्‍ति, 8:30 बजे प्रवचन होगे। राजपुरा जैन मंदिर मे। दोपहर 2:00 बजे भक्‍ताम्‍बर मंडल विधान पुजा देवास के पंडित संजय जैन शास्‍त्री संपन्न करायेगे। प्रतीक्रमण करने से सभी कर्मो का नाश होता है।

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