बुरहानपुर टेक्सटाइल्स पर प्रदूषण फैलाने के आरोप, ताप्ती नदी से लेकर खेतों तक खतरे की आशंका; 5 साल से गुहार लगा रहे सामाजिक कार्यकर्ता, अब आंदोलन की चेतावनी
बुरहानपुर टेक्सटाइल्स पर प्रदूषण फैलाने के आरोप, ताप्ती नदी से लेकर खेतों तक खतरे की आशंका; 5 साल से गुहार लगा रहे सामाजिक कार्यकर्ता, अब आंदोलन की चेतावनी
चिमनियों से निकलते धुएं और केमिकलयुक्त पानी की जांच की मांग, प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की उठाई आवाज
बुरहानपुर। शहर से करीब 3 किलोमीटर दूर बसाड़ रोड स्थित फतेपुर क्षेत्र में बुरहानपुर टेक्सटाइल्स लिमिटेड (BTL) सहित अन्य कारखानों से कथित जल एवं वायु प्रदूषण का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस समस्या को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं और किसानों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग करते हुए चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। उनका आरोप है कि कारखानों से निकलने वाला दूषित धुआं और केमिकलयुक्त पानी आसपास के पर्यावरण, कृषि भूमि और जल स्रोतों को प्रभावित कर रहा है।
ताप्ती नदी के पानी और किसानों की फसलों को लेकर चिंता
सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कारखानों की चिमनियों से लगातार काला और दूषित धुआं निकल रहा है, जिससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ रही है। स्थानीय नागरिकों और ग्रामीणों को सांस लेने में परेशानी होने की बात भी सामने रखी गई है।
वहीं, कारखानों से निकलने वाले केमिकलयुक्त पानी के बिना समुचित उपचार के नदी में पहुंचने की आशंका जताई गई है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि ताप्ती नदी का पानी बुरहानपुर शहर की पेयजल व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए इसकी गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराना बेहद जरूरी है। उनका दावा है कि आसपास के बोरवेल के पानी, कृषि भूमि और फसलों पर भी प्रदूषण का असर पड़ रहा है। पूर्व में नदी में मछलियों के मृत मिलने का मामला भी उन्होंने उठाया है।
पांच वर्षों से आवेदन-निवेदन, कार्रवाई का इंतजार
सामाजिक कार्यकर्ता आकाश गायकवाड़, मयूर पाथरकर, किशोर सिरतुरे और दुर्गेश मेढे सहित किसानों ने आरोप लगाया कि वे पिछले पांच वर्षों से इस समस्या के समाधान के लिए प्रशासन के समक्ष आवेदन और निवेदन प्रस्तुत कर रहे हैं, लेकिन उनके अनुसार अब तक कोई ठोस समाधान नहीं हो पाया है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि मामला केवल पर्यावरण प्रदूषण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे किसानों की आजीविका, ग्रामीणों के स्वास्थ्य और शहर की पेयजल सुरक्षा से जुड़े सवाल भी खड़े होते हैं। उन्होंने संबंधित विभागों से प्रदूषण के स्रोतों की पहचान कर प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की है।
जांच, दंडात्मक कार्रवाई और मुआवजे की मांग
सामाजिक कार्यकर्ताओं और किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित कारखानों के उत्सर्जन और अपशिष्ट जल की वैज्ञानिक जांच कराई जाए। ताप्ती नदी तथा आसपास के बोरवेल के पानी के नमूनों की जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। यदि जांच में प्रदूषण के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही, प्रदूषण से फसलों को नुकसान होने की पुष्टि पर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो चरणबद्ध आंदोलन
कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई और समस्या का समाधान नहीं निकला, तो वे प्रभावित किसानों के साथ चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन का उद्देश्य प्रदूषण की समस्या का समाधान, पर्यावरण की सुरक्षा और किसानों को न्याय दिलाना है।
अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित प्रदूषण नियंत्रण विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल, प्रदूषण संबंधी आरोपों की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक रिपोर्ट सामने आना जरूरी है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और प्रभावित लोगों को राहत मिल सके।
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