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एकबार फिर हुई विंध्य बुंदेलखंड की उपेक्षा,गरजे नारायण कहा जेनजी का जमाना छद्म बर्दाश्त नहीं :- नारायण त्रिपाठी।

एकबार फिर हुई विंध्य बुंदेलखंड की उपेक्षा,गरजे नारायण कहा जेनजी का जमाना छद्म बर्दाश्त नहीं :- नारायण त्रिपाठी।
           मैहर के पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी ने कहा कि जबसे विंध्यप्रदेश का विलय मध्यप्रदेश में हुआ लगातार विंध्य और बुंदेलखंड को छलने का काम किया गया। यहां के युवाओं की यहां के संस्कृति की घोर उपेक्षा की गई। रीवा हमारे विंध्य प्रदेश की राजधानी हुआ करती थी जिसके अस्तित्व को तमाम राजनैतिक षडयंत्रों के तहत खत्म करने का काम किया गया। लेकिन अब यह षडयंत्र नहीं चलेंगे, हमारे क्षेत्र का युवा बेरोजगारी का दंश झेल रहा है क्षेत्र का युवा पलायन को मजबूर है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं के लिए हमें अन्य जिलों या प्रदेश पर निर्भर होना पड़ रहा है। लेकिन इस बात का ध्यान रखा जाना आवश्यक है कि आज का जमाना जेन्जी का है युवाओं का दौर है और यह युवा अपने हक अपना अधिकार लेना जानता है, न मिलने पर छीन के लेने की कूबत रखता है।
        विगत दिनों मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव सरकार की कैबिनेट ने दो महत्वपूर्ण फैसले लिए है। एक राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को तीन भागों में बाटने का कार्य किया गया। जिसमें एक मालवा दूसरा मध्य भारत और तीसरा महाकौशल का नाम दिया गया है। अगर मुख्यमंत्री जी की कैबिनेट ने इसे तीन भागों में बाटने का कार्य किया तो इसमें चौथा विंध्य और पांचवां बुंदेलखंड भी कर सकते थे लेकिन उन्होंने इसे तीन भागों में ही बंटा चौथा,पांचवां रह गया और उसको जबलपुर से जोड़कर महाकौशल का नाम दिया गया,यानी विंध्य और बुंदेलखंड को पूरी तरह आइसोलेट कर दिया गया।
       ठीक इसी तरह से मेडिकल यूनिवर्सिटी आयुर्विज्ञान संस्थान जबलपुर जो मात्र एक यूनिवर्सिटी मेडिकल की थी उसका भी दायरा घटा दिया गया। जबकि पहले इस यूनिवर्सिटी का दायरा पूरा मध्यप्रदेश था। चंबल मालवा भोपाल तक को उज्जैन में ले जाने का कार्य किया गया। जबकि उज्जैन में इसे पूरी तरह से नए सिरे से एस्टेब्लिशमेंट किया जायेगा अभी तो मात्र घोषणा हुई है। कहने का मतलब है कि जबलपुर का दायरा छोटा कर दिया गया इसके बाद भी पूरे विंध्य को जबलपुर में रखा गया जबकि चाहते तो विंध्य और बुंदेलखंड को अलग रख सकते थे। मतलब यहां भी विंध्य और बुंदेलखंड को नाम नहीं मिला पूरी तरह से विंध्य और बुंदेलखंड को आइसोलेट करने का कार्य किया गया।
        पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी ने कहा कि ये दोनों संस्थान हमारे युवाओं से जुड़े थे इसका उपयोग हमारे युवा ही करते लेकिन हमारे विंध्य और बुंदेलखंड के युवाओं को आइसोलेट किया गया,हमारे विंध्य और बुंदेलखंड के कल्चर को आइसोलेट करने का कार्य बेहिचक किया गया।श्री त्रिपाठी ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री जी उज्जैन के है और उनको लगता है कि उज्जैन के छात्रों को उज्जैन में ही शिक्षा मिले तो हम भी चाहते है कि हमारे विंध्य और बुंदेलखंड के विद्यार्थियों को विंध्य और बुंदेलखंड में ही शिक्षा मिले हम आखिर जबलपुर क्यों जायेंगे। कैबिनेट का फैसला यह बताता है कि हमारे विंध्य बुंदेलखंड के विद्यार्थियों की मुख्यमंत्री जी को चिंता नहीं है। *मुखिया मुख सो चाहिए,खान पान को एक* मुख्यमंत्री जी के लिए केवल उज्जैन की अहमियत नहीं होनी चाहिए थी क्योंकि वे पूरे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री है। उनके लिए केवल उज्जैन का कल्चर,मालवा का कल्चर,मध्यभारत का कल्चर अहम नहीं होना चाहिए उनके लिए विंध्य और बुंदेलखंड का कल्चर भी उतना ही अहमियत रखना चाहिए था।
          नारायण त्रिपाठी ने कहा कि जब विंध्य प्रदेश का विलय मध्यप्रदेश में हुआ तो मध्यभारत भी था,विंध्यप्रदेश भी था। मध्यभारत को मध्यभारत का नाम मिला, मालवा को मालवा का नाम मिला,महाकौशल को महाकौशल का नाम मिला जबकि उन दिनों महाकौशल था ही नहीं विंध्यप्रदेश था लेकिन विंध्यप्रदेश और बुंदेलखंड को उसका नाम आज भी नहीं मिला। हमारे विंध्य और बुंदेलखंड की इससे बड़ी उपेक्षा, इतना बड़ा छद्म और क्या हो सकता है। 
             श्री त्रिपाठी ने कहा आज जेन्जी का युग है हमारे विंध्य के युवाओं के हक के साथ हमारे विंध्य और बुंदेलखंड के संस्कृति के साथ जो राजनैतिक षडयंत्र हुआ तो हमारा युवा अपना हक अपना अधिकार लड़ के छीन के लेना जानता है। बड़ी लड़ाई का आगाज किया जायेगा लेकिन विंध्य और बुंदेलखंड के साथ अन्याय नहीं होने दिया जायेगा।

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