शाहपुर में पर्यावरण का कत्ल: 200 पेड़ काटे, 3 सस्पेंड होकर बहाल! दबंग DFO विद्याभूषण सिंह के रहते वन माफिया बेखौफ, गिरफ्तारी कब तक?
शाहपुर में पर्यावरण का कत्ल: 200 पेड़ काटे, 3 सस्पेंड होकर बहाल! दबंग DFO विद्याभूषण सिंह के रहते वन माफिया बेखौफ, गिरफ्तारी कब तक?
बुरहानपुर।* एक तरफ देश के *यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी* "एक पेड़ मां के नाम" अभियान चलाकर हर नागरिक से पेड़ लगाने की अपील कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वन परिक्षेत्र शाहपुर के *इच्छापुर में 200 हरे-भरे पेड़ों को अवैध रूप से काट* दिया गया।
इस शर्मनाक घटना में विभाग ने सिर्फ 3 कर्मचारियों को सस्पेंड कर जुर्माना लगाया और जुर्माना भरते ही उन्हें वापस बहाल भी कर दिया। *DFO विद्या भूषण सिंह के कार्यकाल में अब तक किसी की गिरफ्तारी न होना* वन माफिया के हौसले बुलंद कर रहा है।
*क्या है पूरा मामला?*
वन परिक्षेत्र शाहपुर के अंतर्गत आने वाले इच्छापुर क्षेत्र में विगत दिनों वन विभाग को 200 पेड़ों के अवैध कटान की सूचना मिली। जांच में पाया गया कि हरे-भरे सागौन और अन्य प्रजाति के पेड़ों को रातों-रात काटकर तस्कर ले गए।
मामला सुर्खियों में आने के बाद विभाग ने आनन-फानन में 3 कर्मचारियों पर कार्रवाई कर उन्हें सस्पेंड किया और जुर्माना वसूला। लेकिन हैरानी की बात ये है कि कुछ ही दिनों में जुर्माना भरते ही तीनों कर्मचारी फिर से ड्यूटी पर लौट आए।
*सवालों के घेरे में विभाग*
वन संरक्षण अधिनियम के तहत इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई एक संज्ञेय अपराध है, जिसमें सीधे FIR और जेल का प्रावधान है। फिर भी इस मामले में अब तक *कोई गिरफ्तारी नहीं हुई*।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब 200 पेड़ कटे तो सिर्फ विभागीय कार्रवाई क्यों? आखिर किसके इशारे पर इतना बड़ा कटान हुआ? और DFO के रहते हुए तस्करों पर पुलिस केस क्यों नहीं बना?
*"एक पेड़ मां के नाम" चुनौती 200 पेड़ों का कत्ल*
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर में "एक पेड़ मां के नाम" अभियान चला रहे हैं। उनका संदेश है कि हर व्यक्ति अपनी मां की स्मृति में कम से कम एक पेड़ जरूर लगाए। लेकिन शाहपुर में ठीक उल्टा हो रहा है। यहां संरक्षण के नाम पर 200 पेड़ एक साथ काटे जा रहे हैं।
पर्यावरणविदों का कहना है कि एक पेड़ को बड़ा होने में 15-20 साल लगते हैं। 200 पेड़ काटने का मतलब है आने वाली पीढ़ियों की ऑक्सीजन, पानी और हरियाली छीनना।
*वन माफिया के बढ़ रहे हौसले*
ग्रामीणों का आरोप है कि ऐसी ढीली कार्रवाई से वन माफिया के हौसले और बुलंद होते हैं। जब उन्हें पता चलता है कि पकड़े जाने पर सिर्फ सस्पेंशन और छोटा जुर्माना होगा, तो वो और बड़े अपराध करने से नहीं डरते।
"अगर समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो कल और 200 पेड़ कटेंगे। आज इच्छापुर है, कल पूरा शाहपुर खत्म हो जाएगा," एक स्थानीय ने कहा।
*ग्रामीणों और पर्यावरणविदों की मांग*
1. *तत्काल FIR दर्ज* कर सभी दोषियों की गिरफ्तारी हो
2. *कड़ी कानूनी सजा* हो ताकि दूसरे वन माफिया सबक लें और नए माफिया पैदा न हों
3. कटी हुई जगह पर *5 गुना वृक्षारोपण* कर 5 साल तक उसकी देखरेख की जाए
4. मामले की *उच्च स्तरीय जांच* PCCF स्तर से कराई जाए
*जंगल बचेंगे तभी देश बचेगा*
जंगल बचेंगे तभी देश बचेगा। जब प्रधानमंत्री खुद "एक पेड़ मां के नाम" कहकर पेड़ लगाने की प्रेरणा दे रहे हैं, तो उनके ही राज्य में 200 पेड़ कटना और दोषियों का बच जाना गंभीर चिंता का विषय है।
अब देखना होगा कि वन विभाग सिर्फ कागजों पर कार्रवाई करता है या फिर वास्तव में वन माफिया पर नकेल कसकर उन्हें कड़ी सजा दिलाता है।
rashtriya news
कोई टिप्पणी नहीं