पुरुषोत्तम मास के 28वें दिन नगर निगम आयुक्त संदीप श्रीवास्तव ने किए दर्शन, कथा में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का हुआ रसपान
दुग्धाभिषेक की अविरल धारा में सराबोर हुई श्रद्धा, राम-सीता स्वरूप में सजे लक्ष्मीनारायण देव
पुरुषोत्तम मास के 28वें दिन नगर निगम आयुक्त संदीप श्रीवास्तव ने किए दर्शन, कथा में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का हुआ
रसपान
बुरहानपुर।
सीलमपुरा स्थित 200 वर्ष प्राचीन श्री स्वामीनारायण मंदिर में चल रहे पुरुषोत्तम मास महोत्सव के अंतर्गत 28वें दिन भी भगवान लक्ष्मीनारायण देव एवं हरिकृष्ण महाराज का पंचद्रव्य, दुग्ध, घृत, शर्करा, मधु, नारियल जल तथा पवित्र नदियों के जल से दिव्य अभिषेक किया गया। मंदिर में प्राचीन वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि, भगवान के जयघोष और दुग्धाभिषेक की अविरल धारा का अलौकिक संगम श्रद्धालुओं को भावविभोर कर रहा था,प्रातःकाल से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर रहे थे। 28वें दिन भी मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का वही उत्साह देखने को मिला मानो महोत्सव का पहला ही दिन हो। भगवान के दर्शन कर श्रद्धालु आध्यात्मिक आनंद का अनुभव कर रहे थे।
नगर निगम आयुक्त ने किए दर्शन
इस अवसर पर नगर निगम आयुक्त संदीप श्रीवास्तव अपनी धर्मपत्नी के साथ मंदिर पहुंचे। उन्होंने भगवान लक्ष्मीनारायण देव एवं हरिकृष्ण महाराज का पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रीवास्तव ने कहा कि भगवान स्वामीनारायण द्वारा पूजित एवं भक्तों को प्रदत्त लक्ष्मीनारायण देव की प्रतिमा वाला यह मंदिर किसी तीर्थधाम से कम नहीं है। यहां का आध्यात्मिक वातावरण भक्तों को अद्भुत शांति और दिव्यता का अनुभव कराता है।
संत भवन एवं सभा मंडप निर्माण में भक्तों का सहयोग
मंदिर परिसर में निर्माणाधीन संत भवन एवं सभा मंडप के लिए भक्तों द्वारा श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान दिया जा रहा है। पुरुषोत्तम मास के दौरान सेवा और दान की यह भावना निरंतर बढ़ती जा रही है।
राम-सीता और लक्ष्मण स्वरूप में हुआ दिव्य श्रृंगार
प्रातः श्रृंगार में भगवान लक्ष्मीनारायण देव एवं हरिकृष्ण महाराज को भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मणजी के स्वरूप में सजाया गया। सिंहासन को हरियाली से अलंकृत किया गया था। दिव्य श्रृंगार को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं श्रीराम, सीता और लक्ष्मण धरती पर विराजमान हों। श्रद्धालु इस मनोहारी स्वरूप के दर्शन कर मंत्रमुग्ध हो गए।
भगवान की बाल
लीलाओं से भक्त हुए भावविभोर
धर्मसभा में शास्त्री चिंतनप्रियदासजी स्वामी ने श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध का वर्णन करते हुए भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का रसपान कराया। उन्होंने माखन चोरी, गोपियों के साथ भगवान की मधुर लीलाओं तथा गोपी की चोटी ,खाट से बांधने की लीला का वर्णन किया। मुक्तानंद स्वामी एवं अन्य संतों द्वारा रचित कीर्तनों के माध्यम से भी भगवान की माखन लीला का भावपूर्ण प्रस्तुतीकरण किया गया।
सच्ची भक्ति से भगवान भी भक्तों पर मोहित हो जाते हैं
स्वामी श्री ने कहा कि बच्चों को संस्कारी बनाने की पहली जिम्मेदारी माता-पिता की होती है। उन्होंने भगवान की योगमाया का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान अपनी दिव्य माया से भक्तों के साथ प्रेममय संबंध स्थापित करते हैं। जब भक्त निष्काम भाव से भक्ति करता है, तब भगवान भी उस भक्त के प्रेम से मोहित हो जाते हैं। यही कारण है कि वृंदावन की गोपियां, राधाजी तथा यशोदा मैया भगवान को अपने प्रेम से बांध सकीं।
उन्होंने श्रीमद्भागवत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि नंद बाबा और यशोदा मैया पूर्व जन्म में द्रोण और धारा नामक दिव्य दंपति थे। उन्होंने भगवान को पुत्र रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें वरदान दिया और द्वापर युग में उनके यहां श्रीकृष्ण के रूप में अवतरित हुए। यह प्रसंग भगवान और भक्त के बीच अटूट प्रेम एवं समर्पण की महिमा को दर्शाता है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत, हरिभक्त एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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