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भूसे के नीचे छिपा था काला खेल, वन विभाग ने माफियाओं पर कसा शिकंजा

खकनार वन विभाग की बड़ी स्ट्राइक: साढ़े 8 क्विंटल अवैध सलाई गोंद के साथ पिकअप जप्त
डोईफोड़िया क्षेत्र के गोंद माफियाओं पर शासन का प्रहार; भूसे की बोरियों के नीचे छिपाकर ले जाई जा रही थी खेप


बुरहानपुर



जिले में सलाई गोंद के दोहन पर लगे प्रतिबंध के बावजूद माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। लेकिन रविवार सुबह खकनार वन विभाग ने एक बड़ी कार्यवाही करते हुए अवैध गोंद के काले कारोबार को करारा झटका दिया है। खकनार रेंजर रितेश उईके के नेतृत्व में टीम ने घेराबंदी कर लगभग साढ़े आठ क्विंटल अवैध सलाई गोंद से भरी एक पिकअप गाड़ी जप्त की है।

मुखबिर की सूचना पर सुबह 6 बजे दबिश
जानकारी के अनुसार, खकनार रेंजर रितेश उईके को रविवार सुबह करीब 6 बजे मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक पिकअप वाहन में बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित सलाई गोंद तस्करी के लिए ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही रेंजर अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। वन विभाग की टीम को देखते ही वाहन चालक चाबी लेकर मौके से फरार हो गया।

शातिर तरीके से की गई थी लोडिंग
जब टीम ने लावारिस हालत में खड़े वाहन की जांच की, तो उसमें ऊपर सफेद बोरियों में गेहूं का भूसा भरा हुआ था ताकि किसी को शक न हो। लेकिन जब भूसे की बोरियों को हटाया गया, तो नीचे भारी मात्रा में सलाई गोंद बरामद हुआ। वाहन की चाबी न होने के कारण वन विभाग की टीम ने ट्रैक्टर की मदद से पिकअप को टोचन कर खकनार कार्यालय पहुंचाया।

डोईफोड़िया कनेक्शन आया सामने
सूत्रों की मानें तो इस अवैध कारोबार के तार ग्राम डोईफोड़िया से जुड़े हुए हैं। बताया जा रहा है कि इस क्षेत्र में गोंद निकालने से लेकर उसे खपाने तक का एक बड़ा सिंडिकेट सालों से सक्रिय है। प्रतिबंध के बाद ये माफिया और ज्यादा सक्रिय हो गए हैं और पेड़ों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाकर गोंद निकाल रहे हैं।
"हमें मुखबिर से सूचना मिली थी कि भूसे के नीचे गोंद ले जाया जा रहा है। मौके से करीब 8.5 क्विंटल गोंद जप्त किया गया है। वाहन चालक फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है। वाहन मालिक और अन्य संबंधितों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर सख्त कार्यवाही की जा रही है।"


— रितेश उईके, रेंजर, खकनार
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
खकनार ब्लॉक का अधिकांश हिस्सा जंगल से लगा होने के कारण यहाँ माफिया हमेशा सक्रिय रहते हैं। चर्चा है कि यदि प्रशासन डोईफोड़िया कनेक्शन की गहराई से जांच करे, तो कई बड़े नामों का खुलासा हो सकता है। अब देखना यह है कि विभाग इस कार्यवाही को अंजाम तक पहुंचाता है या फिर रसूखदार माफिया किसी 'संरक्षण' के चलते बच निकलने में कामयाब होते हैं।

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