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कृष्ण जन्मभूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग तेज — बुरहानपुर में जनजागृति यात्रा के दौरान संत समाज का सरकार को अल्टीमेटम, न्याय नहीं मिला तो आंदोलन और कार सेवा की चेतावनी

कृष्ण जन्मभूमि पर बढ़ा संघर्ष!” — अतिक्रमण हटाने को लेकर संतों का अल्टीमेटम, बुरहानपुर से उठी जनजागृति की हुंकार 
बुरहानपुर।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर देशभर में चल रही जनजागृति यात्रा ने अब जोर पकड़ लिया है। बुरहानपुर में इस अभियान के तहत संत समाज ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि समय रहते न्याय नहीं मिला, तो आंदोलन और कर सेवा जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। करीब 13.37 एकड़ भूमि में से लगभग ढाई एकड़ जमीन को लेकर मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। मथुरा को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली माना जाता है और ऐतिहासिक संदर्भों में यहां भव्य मंदिर होने का उल्लेख मिलता है, जिन्हें विभिन्न कालखंडों में आक्रमणों के दौरान नुकसान पहुंचा।
 इतिहास और विवाद की पृष्ठभूमि
इतिहास के पन्नों में इस स्थल को लेकर कई घटनाओं का उल्लेख मिलता है। कुछ विवरणों में महमूद गजनवी के हमलों का जिक्र है, वहीं मुगल काल में भी मंदिरों से जुड़ी घटनाएं सामने आईं। ब्रिटिश काल से लेकर आज तक यह मामला कई कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरता रहा है।
1951 में श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट का गठन हुआ और मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया। इसके बाद 1968 में मंदिर ट्रस्ट और ईदगाह कमेटी के बीच समझौता हुआ, जिसमें विवादित हिस्से के उपयोग को लेकर सहमति बनी।
 अदालत में लंबित, देश की नजरें टिकीं
वर्तमान में यह पूरा मामला अदालत में विचाराधीन है और सभी पक्ष अपनी-अपनी दलीलें पेश कर रहे हैं। आने वाले समय में अदालत के फैसले पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।
 आचार्य राजेश्वर जी का बड़ा बयान
इस बीच आचार्य राजेश्वर जी ने मीडिया से बातचीत में सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि
गली से लेकर दिल्ली तक सरकार होने के बावजूद संत समाज के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखाई जा रही है।”
आचार्य ने साफ चेतावनी देते हुए कहा—
“हमने न्यायालय में याचिका दायर की है, लेकिन यदि संतों की भावनाओं को नजरअंदाज किया गया, तो हमें आंदोलन और कर सेवा का रास्ता अपनाना पड़ेगा।”
 जनजागृति यात्रा से तेज हुआ आंदोलन
बुरहानपुर में इस जनजागृति यात्रा के माध्यम से संत समाज ने स्पष्ट कर दिया है कि यह सिर्फ धार्मिक मुद्दा नहीं, बल्कि आस्था और सम्मान का विषय है। अब यह देखना अहम होगा कि अदालत का फैसला और सरकार का रुख इस पूरे मामले को किस दिशा में ले जाता है।
 निष्कर्ष:
कृष्ण जन्मभूमि विवाद एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बनता जा रहा है। बुरहानपुर से उठी यह आवाज आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है।

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