मजदूरों का वोट = सोनार बंगला? BJP ने सूरत से 5000 वोटरों को फ्री भेजकर TMC को दी बड़ी चुनौती... अब 4 मई को फैसला!
चुनाव से पहले 5000 लोगों को ट्रेन में भर-भरकर क्यों भेजा जा रहा पश्चिम बंगाल? ऐसी राजनीति के चाणक्य भी न समझ पाएंगे खेल!
पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले सूरत से जो तस्वीर सामने आई है, उसने राजनीति के जानकारों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है. उधना रेलवे स्टेशन से 'वोटर्स स्पेशल' ट्रेन के जरिए बड़ी संख्या में बंगाली मतदाताओं को उनके राज्य भेजा जा रहा है, ताकि वे अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें ।
स्टेशन पर तिरंगा लहराते लोग, 'वंदे मातरम' और 'जय श्री राम' के नारे लगाते लोगों के समूह हो जिसने भी देखा, सब हैरान हो गए. राजनीतिक चाणक्य भी इस रणनीति को देखकर हैरान हो सकते हैं. करीब 1300 लोग पहली ट्रेन से रवाना हुए, जबकि कुल मिलाकर 5000 लोगों को चार ट्रेनों के जरिए भेजने की योजना है. सूरत से बंगाल क्यों भेजी जा रही 4 स्पेशल ट्रेन में 5000 वोटर, समझिए पूरी रणनीति!
सूरत के उधना से पश्चिम बंगाल क्यों भेजी जा रही ट्रेन
सूरत का उधना रेलवे स्टेशन इन दिनों देखने लायक हो गया है. जहां रोजाना सिर्फ कामकाजी भीड़ दिखती है, वहां अब हाथों में तिरंगा, मुंह पर वंदे मातरम और जय श्री राम के नारे गूंज रहे हैं. चार खास 'वोटर्स स्पेशल' ट्रेनें चलाई जा रही हैं. इनमें करीब 5000 बंगाली वोटर भरे जा रहे हैं. क्यों? क्योंकि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव ठीक दरवाजे पर हैं. सूरत में रहने वाले ये मजदूर सालों से अपने वोट का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे. काम की मजबूरी, महंगे टिकट और घर की दूरी. सब कुछ रुकावट बन गया था. लेकिन भाजपा की सूरत इकाई और बंगाली समुदाय ने मिलकर ऐसा प्लान बनाया कि अब कोई बहाना नहीं बचा. ट्रेन रवाना होते वक्त का नजारा दिल छू लेने वाला था. लोग एक-दूसरे को गले लगा रहे थे, बच्चे खुशी से नाच रहे थे और बुजुर्ग आंखों में आंसू लिए मुस्कुरा रहे थे. महिलाएं साड़ी संभालते हुए तिरंगा लहरा रही थीं. पूरा स्टेशन वंदे मातरम से गूंज उठा।।
रणनीति क्या है जो चाणक्य भी सोचकर रह जाएं?
असल में सूरत में 2.5 लाख बंगाली रहते हैं. ज्यादातर हीरा पॉलिशिंग और कपड़ा मिलों में काम करते हैं. ये लोग उन बंगाल के इलाकों से हैं जहां भाजपा पहले से लड़ रही है. पार्टी ने महीनों पहले इन वोटरों की पूरी लिस्ट तैयार की. वोटर आईडी चेक की, सिर्फ असली लोगों को ट्रेन में जगह दी गई. चारों ट्रेनें पूरी तरह फ्री हैं - टिकट, खाना, पानी सब पार्टी उठा रही है. पहली ट्रेनें 18-20 अप्रैल के आसपास निकल चुकी हैं, बाकी 24 अप्रिल को रवाना होंगी. सीधे कोलकाता पहुंचकर वोटर अपने गांव जाएंगे।
TMC ने क्यों कर दी शिकायत?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, टीएमसी ने इसे बिल्कुल पसंद नहीं किया. उन्होंने कहा कि पार्टी पैसे खर्च करके वोटर भेज रही है, जो चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है. TMC ने चुनाव आयोग से तुरंत कार्रवाई की मांग की. उनका आरोप है कि ये वोट खरीदने जैसा है. लेकिन भाजपा का जवाब साफ है - "हम टिकट खरीद रहे हैं, वोट नहीं. वोट तो लोग अपनी मर्जी से डालेंगे." दोनों तरफ बहस तेज हो गई है. कई पुराने राजनीतिक विश्लेषक कह रहे हैं कि इतने बड़े पैमाने पर प्रवासी वोटर भेजना शायद पहली बार हुआ है।
*हीरा-कपड़ा मजदूरों को मिला लाइफटाइम तोहफा*
सूरत का हीरा उद्योग रात-दिन चलता है. यहां काम करने वाले बंगाली मजदूर सुबह 7 बजे मशीन के आगे खड़े हो जाते हैं और रात 9 बजे तक नहीं हिलते. छुट्टी मिलती नहीं, परिवार बंगाल में छूटा रहता है. शादी-त्योहार-चुनाव सब पीछे छूट जाता था. अब ये ट्रेन उनके लिए सपने जैसी है. एक बुजुर्ग मजदूर ने कहा, "पहले तो टिकट का पैसा जुटाना मुश्किल था, अब तो छुट्टी भी नहीं मिलती थी. इस बार पूरा परिवार वोट डालने जाएगा." युवा लड़के-लड़कियां कह रहे हैं कि ममता दीदी के राज में बंगाल की हालत देखकर अब बदलाव चाहिए.
*5000 वोटर कितने गेमचेंजर साबित हो सकते हैं?*
पश्चिम बंगाल में 294 सीटें हैं. कई सीटों पर कुछ हजार वोटों से फैसला होता है. अगर ये 5000 वोटर ठीक उन इलाकों में पहुंचे जहां मुकाबला कड़ा है, तो नतीजा पलट सकता है. भाजपा ने दो अलग-अलग टीमें बनाई हैं - एक सूरत में वोटर तैयार करने के लिए, दूसरी बंगाल में स्वागत और मतदान करवाने के लिए. ट्रेन में सिर्फ वैरिफाइड वोटर हैं, कोई फर्जी नाम नहीं चला. पार्टी इसे 'सोनार बंगाल' बनाने का हथियार मान रही है.
*देशभक्ति का जज्बा और लोकतंत्र की जीत*
ट्रेन में चढ़ते वक्त कई लोग भावुक हो गए. वे कह रहे थे, "हम सूरत में रोटी कमाते हैं लेकिन दिल बंगाल में है. अब वोट देकर अपना फर्ज निभाएंगे." स्टेशन पर तिरंगा लहराते, नारे लगाते ये नजारे देखकर लगता है कि चुनाव सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि आम आदमी की आवाज भी है. चाहे कोई इसे रणनीति कहे या चाणक्य नीति, लेकिन हकीकत ये है कि हजारों मजदूर अब अपने अधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे.
*क्या होगा असली असर?*
अभी ट्रेनें रवाना हो रही हैं. 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान है, 29 अप्रैल को दूसरा. इन 5000 वोटरों के अलावा रेलवे ने भी स्पेशल ट्रेनें बढ़ा दी हैं. सूरत से बंगाल जाने वाली आम ट्रेनों में भी भीड़ बढ़ गई है. जानकार कहते हैं कि अगर ये वोटर ठीक से मतदान करते हैं तो कुछ सीटों पर फर्क साफ दिखेगा. बंगाल की सियासत में 'सूरत प्लान' अब सबसे हॉट टॉपिक बन गया है.
*आखिरकार ये पहल किसे फायदा पहुंचाएगी?*
देखा जाए तो ये पहल कई मायनों में अनोखी है. दूर बैठे मजदूर अब सोच रहे हैं कि उनका वोट मायने रखता है. एक महिला वोटर ने कहा, "घर की बहू-बेटियां पहले वोट नहीं डाल पाती थीं. इस बार पूरा परिवार जाएगा." चाहे राजनीति कुछ भी कहे, लेकिन स्टेशन पर जो उत्साह दिख रहा है, वो सच में लोकतंत्र की ताकत बता रहा है. _4 मई को नतीजे आएंगे तो पता चलेगा कि ये चार ट्रेनें कितना खेल बदल देंगी।
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