विकास के दावों की खुली पोल: नादियामाल के 250 परिवार पानी-सड़क-बिजली के लिए तरस रहे, फूटा ग्रामीणों का गुस्सा।
विकास के दावों की खुली पोल: नादियामाल के 250 परिवार पानी-सड़क-बिजली के लिए तरस रहे, फूटा ग्रामीणों का गुस्सा।
एंबुलेंस तक नहीं पहुंचती, अंधेरे में जिंदगी… अब आंदोलन की चेतावनी।
मध्यप्रदेश के ग्राम पंचायत बाकड़ी के अंतर्गत आने वाला नादियामाल आज भी विकास से कोसों दूर है…
जहां एक तरफ सरकार गांव-गांव तक योजनाएं पहुंचाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर नादियामाल के करीब 200 से 250 परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
पानी की समस्या सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है।
ग्रामीणों को रोजाना पहाड़ों से पानी लाना पड़ता है… खासकर महिलाएं और बच्चे भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। बरसात के दिनों में फिसलन भरे रास्तों पर जान जोखिम में डालकर पानी लाना उनकी मजबूरी बन चुकी है।
सड़क नहीं, तो जिंदगी ठप!
नादियामाल आज भी मुख्यधारा से कटा हुआ है। बारिश के समय नदी-नाले उफान पर आ जाते हैं और गांव का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है।
इस दौरान कोई भी आपातकालीन सेवा गांव तक नहीं पहुंच पाती… सबसे ज्यादा संकट गर्भवती महिलाओं के लिए खड़ा हो जाता है, क्योंकि एंबुलेंस तक गांव में प्रवेश नहीं कर पाती।
बिजली का अंधेरा, शिक्षा पर संकट
गांव में बिजली की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है… अंधेरे में जीवन जीने को मजबूर ग्रामीणों के बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
इतना ही नहीं, यहां न तो आंगनवाड़ी केंद्र है और न ही कोई स्कूल… जिससे बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
। सरकारी योजनाएं कागजों तक सीमित?
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें अब तक किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला। कई बार प्रशासन को शिकायत देने के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं।
अब आंदोलन की चेतावनी
लगातार बढ़ती समस्याओं और अनदेखी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नादियामाल क्षेत्र का तुरंत सर्वे कराया जाए और पानी, सड़क, बिजली, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराई जाएं।
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