गैस ने तोड़ा बजट, चूल्हे ने संभाली रसोई: महंगाई के बीच खंडवा में लौटी पुरानी परंपरा!
खंडवा रिपोर्ट नितिन झवर रसोई गैस की लगातार बढ़ती कीमतों और समय पर सिलेंडर की उपलब्धता में आ रही दिक्कतों के चलते अब लोग पुराने दिनों की ओर लौटते नजर आ रहे हैं।
जहां पहले हर घर में चूल्हे पर खाना बनाना आम बात थी, वहीं अब एक बार फिर वही परंपरा वापस आती दिख रही है।
शहर के सिविल लाइन क्षेत्र में इन दिनों चूल्हों की मांग अचानक बढ़ गई है।
नासिक से आए एक व्यक्ति द्वारा यहां चूल्हों की दुकान लगाई गई, जहां बड़ी संख्या में लोग खरीदारी करने पहुंचे। खरीदारों का कहना है कि गैस की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और समय पर सिलेंडर नहीं मिलने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, ऐसे में चूल्हा और भट्टी एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आ रहे हैं।
दुकानदार के अनुसार, चूल्हों को लेकर लोगों में अच्छा रिस्पॉन्स देखने को मिल रहा है। खासकर छोटे व्यवसायी और होटल संचालक चूल्हों की ओर रुख कर रहे हैं।
उनका कहना है कि सरकार द्वारा कमर्शियल गैस सिलेंडर पर लगाई गई पाबंदियों के कारण दुकान चलाना मुश्किल हो रहा है, इसलिए वे वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में चूल्हों का उपयोग करना चाहते हैं।
बढ़ती महंगाई और गैस संकट के बीच यह बदलाव साफ तौर पर दर्शाता है कि लोग अब फिर से पारंपरिक तरीकों की ओर लौटने को मजबूर हो रहे हैं।
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