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भोपाल एग्रीकल्चर एक्सपो-मंडला की महिला किसानों की बायोचार तकनीक ने खींचा सबका ध्यान

 


भोपाल एग्रीकल्चर एक्सपो-मंडला की महिला किसानों की बायोचार तकनीक ने खींचा सबका ध्यान

  • नवाचार से सशक्त होतीं महिला किसान

  • भोपाल में मंडला की बायोचार इकाई को मिली बड़ी सराहना


नारायणगंज/निवास। प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित एग्रीकल्चर एक्सपो इन दिनों प्रदेश भर के किसानों, स्टार्टअप्स और कृषि विशेषज्ञों के लिए नवाचार का एक बड़ा केंद्र बना हुआ है। इस प्रतिष्ठित प्रदर्शनी में मंडला जिले के निवास एवं नारायणगंज विकासखंड की महिला किसानों ने अपने अनूठे कृषि नवाचारों से गहरी छाप छोड़ी है। विशेष रूप से महिला किसानों द्वारा संचालित बायोचार इकाई को विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों का भरपूर प्रोत्साहन मिल रहा है। प्रदान संस्था के अनुरुद्ध कुमार शास्त्री ने बताया कि मंडला की महिला किसानों को यदि सही मार्गदर्शन और तकनीक मिले, तो ग्रामीण महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं। एक्सपो में मिली इस पहचान से जिले की अन्य महिला किसानों में भी उत्साह का संचार हुआ है।

  • बताया गया कि मंडला से भोपाल पहुंची महिला किसानों ने एक्सपो में अपनी प्रदर्शनी के माध्यम से कृषि, आजीविका और नवाचार से जुड़े अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि वे किस प्रकार प्रदान संस्था के सहयोग से जमीनी स्तर पर आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल कृषि कार्यों को अंजाम दे रही हैं। इन किसानों ने साझा किया कि बायोचार तकनीक के प्रयोग से न केवल फसलों की उत्पादकता में सुधार हुआ है, बल्कि रासायनिक उर्वरकों पर उनकी निर्भरता भी काफी कम हुई है।


बायोचार, मिट्टी और पर्यावरण के लिए वरदान :

प्रदर्शनी का अवलोकन करने पहुंचे कृषि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने बायोचार पहल की मुक्त कंठ से सराहना की। अधिकारियों ने कहा कि बायोचार जैसी तकनीकें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ जलवायु परिवर्तन के खतरों को कम करने में भी सहायक हैं। सरकार का लक्ष्य है कि ऐसी इकाइयों का विस्तार कर उन्हें प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ा जाए, ताकि किसानों की आय में स्थायी वृद्धि हो सके।

मुख्यमंत्री ने किया नवाचारों का अवलोकन :

एक्सपो के दौरान मुख्यमंत्री ने भी विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को और सशक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री के अनुसार, एग्रीकल्चर एक्सपो जैसे आयोजन किसानों को नई तकनीकों से जोडऩे और खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक्सपो में आधुनिक कृषि यंत्र, जैविक खेती, जल संरक्षण और मूल्य संवर्धन से जुड़े उत्पादों का विशेष प्रदर्शन किया जा रहा है।



इनका कहना है

बायोचार यूनिट्स में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि अपशिष्ट जैसे धान की भूसी, मक्का के डंठल, जगनी रामतिला, राखड़ आदि का उपयोग करते हुए पर्यावरण अनुकूल पायरोलेसिस प्रक्रिया द्वारा बायोचार का निर्माण किया जा रहा है। 

पूनम, प्रदान संस्था


संस्था के सहयोग से हम महिलाओं ने नई तकनीकें अपनाई हैं। इससे हमारी खेती मजबूत हुई है और अब हम आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं।

मुन्नी विश्वकर्मा, महिला किसान


हम महिलाओं ने बायोचार को अपनाकर अपनी खेती में अच्छा बदलाव देखा है। मिट्टी की सेहत बेहतर हुई है और लागत भी कम हुई है। यहां आने का अवसर मिलना हमारे लिए प्रेरणादायक है और इससे हमें आगे और बेहतर काम करने का हौसला मिला है।

बिस्मा वरकड़े, महिला किसान

महिला किसान आज केवल खेती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे नवाचार और पर्यावरण-संवेदनशील तकनीकों को अपनाकर नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं। बायोचार इकाई जैसी पहल से न केवल मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है, बल्कि महिलाओं की आय और आत्मनिर्भरता भी बढ़ रही है। सभी कृषि अधिकारियों का यह समर्थन जमीनी स्तर पर कार्य कर रही महिला किसानों के लिए एक बड़ा संबल है।

अनुरुद्ध कुमार शास्त्री, प्रदान संस्था


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