शिक्षक एकता की मिसाल: पी.एम.यू.एम. संघ ने रचा इतिहास, संकट की घड़ी में परिवारों को 40–50 लाख का संबल
दिवंगत सदस्य के परिजनों को 40 से 50 लाख रुपये तक का आर्थिक सहयोग
“कर्मचारी ही बना कर्मचारी का सच्चा पालक”
पी.एम.यू.एम. शिक्षक संघ द्वारा संचालित कर्मचारी कल्याण कोष योजना शिक्षा विभाग एवं आदिम जाति कल्याण विभाग के शिक्षकों-कर्मचारियों के लिए संकट की घड़ी में आशा और संबल का मजबूत आधार बनकर उभरी है। इस योजना के माध्यम से आकस्मिक निधन की स्थिति में दिवंगत कर्मचारी के परिजनों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
जिला प्रभारी एवं जिला अध्यक्ष श्री संतोष निंभोरे (जिला बुरहानपुर) ने इस योजना को कर्मचारी एकता का जीवंत उदाहरण बताते हुए कहा कि—
“पी.एम.यू.एम. शिक्षक संघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक परिवार है। यहाँ कर्मचारी अकेला नहीं होता, उसके साथ 74 हजार से अधिक साथी खड़े रहते हैं। कर्मचारी कल्याण कोष योजना यह प्रमाणित करती है कि संगठित शक्ति किस प्रकार किसी परिवार को टूटने से बचा सकती है। यह योजना दिवंगत साथियों के प्रति हमारी संवेदना ही नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक जिम्मेदारी का परिचायक है।”
उन्होंने बताया कि संघ के किसी भी पंजीकृत सदस्य के दुर्भाग्यपूर्ण निधन पर संस्थापक श्री सतीश खरे की घोषणा अनुसार न्यूनतम 25 लाख रुपये से लेकर 40–50 लाख रुपये तक की सहयोग राशि दिवंगत सदस्य के परिजनों को प्रदान की जाती है। पूर्व में दमोह जिले के दिवंगत सदस्य स्व. श्री दिलीप सिंह लोधी जी के परिजनों को 40 लाख रुपये का सहयोग प्रदान कर संघ ने इस योजना को व्यवहारिक रूप से सिद्ध किया है।
इसी क्रम में वर्तमान में दतिया जिले में पदस्थ एवं निवाड़ी जिले के निवासी स्व. श्री राकेश कुमार अहिरवार जी के दुःखद निधन पर संघ द्वारा दूसरा सहयोग अभियान संचालित किया जा रहा है। जिला अध्यक्ष श्री निंभोरे ने सभी सदस्यों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि—
“आज किसी और के परिवार के लिए दिया गया सहयोग, कल हमारे परिवार की ढाल बन सकता है। इसलिए 26 जनवरी तक प्रत्येक सदस्य का सहयोग न केवल आवश्यक, बल्कि नैतिक कर्तव्य भी है।”
सह-संस्थापक एवं प्रांताध्यक्ष श्री मुरली मनोहर अरजरिया ने जानकारी दी कि वर्तमान में संघ की सदस्य संख्या 74,000 से अधिक हो चुकी है। संस्थापक श्री सतीश खरे के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में संचालित इस दूसरे सहयोग अभियान में अब तक 28 लाख रुपये से अधिक की राशि एकत्रित की जा चुकी है। यह सहयोग 26 जनवरी तक ही स्वीकार किया जाएगा, इसके पश्चात अभियान बंद कर दिया जाएगा। सहयोग न करने वाले सदस्य कर्मचारी कल्याण कोष योजना के लाभ से वंचित रहेंगे।
सह-संस्थापक श्री ब्रजेश असाटी ने बताया कि पूर्व सहयोग अभियान में प्रति सदस्य ₹100 की राशि निर्धारित थी, जबकि इस बार स्व. श्री राकेश कुमार अहिरवार जी के लिए ₹80 प्रति सदस्य की सहयोग राशि तय की गई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कम राशि होने के बावजूद सामूहिक सहयोग से यह अभियान लगभग 40 लाख रुपये तक पहुँचेगा।
कर्मचारी कल्याण कोष के संस्थापक श्री सतीश खरे ने स्पष्ट किया कि 26 जनवरी तक सदस्यता लेने वाले सभी सदस्यों के लिए सहयोग करना अनिवार्य है। यदि किसी सदस्य की सदस्यता अवधि तीन माह पूर्ण हो चुकी हो और उसने सहयोग नहीं किया हो, तथा दुर्भाग्यवश उसका निधन हो जाए, तो संघ के नियमानुसार उसके परिजनों को कल्याण कोष का लाभ प्रदान नहीं किया जाएगा।
अंत में उन्होंने सभी सदस्यों से आग्रह किया कि सहयोग राशि जमा करने के पश्चात उसका स्क्रीनशॉट संघ की वेबसाइट पर अपलोड करें, उसे अपने अभिलेखों में सुरक्षित रखें तथा अपने परिजनों को इसकी जानकारी अवश्य दें।
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