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जब देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती के विवाह से गूंजा कथा पंडाल

 


जब देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती के विवाह से गूंजा कथा पंडाल

  • देवताओं ने दी अपनी शक्तियां :

  • शिव-पार्वती विवाह का हुआ दिव्य प्रसंग :


मंडला - महाराजपुर - सुरंगदेवरी स्थित प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र श्री सिद्धेश्वर धाम में श्री गणेश पुराण कथा के तीसरे दिन सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित ललित नारायण मिश्रा ने भगवान श्री गणेश की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान पंडाल गणपति बाप्पा मोरया के जयकारों से गुंजायमान रहा। पंडित ललित नारायण ने विस्तार से बताया कि कैसे विघ्नहर्ता गणेश समस्त देवों में प्रथम पूज्य बने और उनके प्राकट्य के पीछे का आध्यात्मिक रहस्य क्या है। सुमधुर वाणी से बह रही ज्ञान गंगा का लाभ लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। कथा के दौरान पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर नजर आया।



कथावाचक पंडित ललित नारायण ने उस प्रसंग का उल्लेख किया जब देवताओं के मध्य प्रथम पूज्य बनने की प्रतिस्पर्धा हुई। शर्त थी कि जो संपूर्ण ब्रह्मांड की परिक्रमा सबसे पहले करेगा, वही प्रथम पूज्य कहलाएगा। जहां अन्य देवता अपने वाहनों पर सवार होकर ब्रह्मांड की परिक्रमा पर निकल गए, वहीं श्री गणेश ने अपनी तीक्ष्ण बुद्धि और भक्ति का परिचय दिया। उन्होंने अपने माता-पिता शिव-शक्ति को ही साक्षात् ब्रह्मांड मानकर उनके चारों ओर परिक्रमा की।



देवताओं ने दी अपनी शक्तियां :

  • उन्होंने कहां कि शास्त्रों के अनुसार माता-पिता के चरणों में ही समस्त तीर्थ और ब्रह्मांड समाहित है। इस बुद्धिमत्ता और अटूट श्रद्धा को देखकर भगवान शिव ने उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया। कथा में आगे बताया कि जब गजमुख गणेश का प्राकट्य हुआ, तब ब्रह्मांड की रक्षा और विघ्नों के नाश के लिए सभी प्रमुख देवताओं ने अपनी-अपनी सिद्धियां और शक्तियां गणेश जी को अर्पित कीं। वहीं भगवान विष्णु ने अपनी विद्या, बुद्धि और विवेक प्रदान किया। इंद्र देव ने अपना अंकुश भेंट किया। वरुण देव ने उन्हें पाश और अमृत का अंश दिया। यही कारण है कि गणेश जी अकेले ही समस्त बाधाओं को हरने में सक्षम हैं, क्योंकि उनमें सभी देव शक्तियों का समन्वय है।

शिव-पार्वती विवाह का दिव्य प्रसंग :

कथा के उत्तरार्ध में भगवान शंकर और माता पार्वती के विवाह का प्रसंग विस्तार से सुनाया गया। पंडित ललित नारायण मिश्रा ने बताया कि कैसे माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर महादेव को प्राप्त किया। सती के आत्मदाह के बाद माता पार्वती ने पर्वतराज हिमवान के घर जन्म लिया और भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक निराहार तप किया। शिव जी की विचित्र बारात का वर्णन सुन श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए, जिसमें भूत-प्रेत, नंदी, श्रृंगी और समस्त देवी-देवता शामिल थे। यह विवाह केवल दो सत्ताओं का मिलन नहीं, बल्कि प्रकृति और पुरुष का मिलन है। शिव और शक्ति के मिलन से ही सृष्टि का संचालन संभव है। पंडित ललित नारायण मिश्रा ने कहां कि श्री गणेश जी की पूजा केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि बुद्धि और भक्ति के संतुलन का मार्ग है। जो व्यक्ति अपने माता-पिता का सम्मान करता है, उसे गणेश जी की कृपा स्वत: ही प्राप्त हो जाती है। 


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