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रिश्वत का विरोध पड़ा भारी! सफाईकर्मी की नौकरी गई, झाड़ू और तिरंगा लेकर न्याय मांगने निकला

रिश्वत का विरोध पड़ा भारी! सफाईकर्मी की नौकरी गई, झाड़ू और तिरंगा लेकर न्याय मांगने पहुंचा कलेक्टर कार्यालय

2018 में नौकरी से हटाए जाने का आरोप, बोले- भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई तो परिवार पर टूटा रोजी-रोटी का संकट, अब कलेक्टर से न्याय की उम्मीद।
बुरहानपुर। भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना एक सफाईकर्मी को इतना भारी पड़ा कि उसे अपनी नौकरी से ही हाथ धोना पड़ा। यह आरोप खुद नगर निगम के एक पूर्व सफाईकर्मी ने लगाया है। वर्षों से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे इस कर्मचारी ने अनोखे अंदाज में अपना विरोध दर्ज कराया। एक हाथ में झाड़ू और दूसरे हाथ में तिरंगा लेकर वह कलेक्टर कार्यालय पहुंचा। उसका यह अनोखा प्रदर्शन देखकर वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए।

सफाईकर्मी ने अपनी पीड़ा बताते हुए आरोप लगाया कि वर्ष 2018 में नगर निगम के कुछ अधिकारियों ने षड्यंत्रपूर्वक उसे नौकरी से बाहर कर दिया। उसका कहना है कि वह अधिकारियों द्वारा कथित रूप से की जा रही रिश्वतखोरी का विरोध कर रहा था, जिसके चलते उसे नौकरी से हटना पड़ा।

उसने बताया कि नौकरी छिनने के बाद उसके और उसके परिवार के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया। लंबे समय से वह परेशानियों का सामना कर रहा है, लेकिन अब तक उसे न्याय नहीं मिल पाया है। इसी उम्मीद के साथ वह अपनी फरियाद लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचा है।

मुख्यमंत्री का जताया आभार, कलेक्टर से न्याय की उम्मीद
सफाईकर्मी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने बुरहानपुर जिले में एक ईमानदार और दरियादिल कलेक्टर का चयन किया है। उसे पूरी उम्मीद है कि कलेक्टर उसकी समस्या को गंभीरता से सुनेंगे और उसे तथा उसके परिवार को न्याय दिलाने के लिए उचित कदम उठाएंगे।

झाड़ू और तिरंगे से दिया अनोखा संदेश

अपने प्रदर्शन में झाड़ू और तिरंगा लेकर पहुंचने के पीछे भी सफाईकर्मी ने खास संदेश दिया। उसका कहना है कि कोई भी काम हो, उसमें झाड़ू का अपना महत्व है।

 वहीं तिरंगा देश की शान और सम्मान का प्रतीक है। उसने कहा कि वह इसी देश का नागरिक है और उसे अपने देश पर गर्व है।

अब बड़ा सवाल यह है कि रिश्वतखोरी का विरोध करने के आरोप में नौकरी गंवाने वाले इस सफाईकर्मी की शिकायत पर प्रशासन क्या कदम उठाएगा? क्या वर्षों से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे इस कर्मचारी और उसके परिवार को फिर से राहत मिल पाएगी? अब सबकी निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।


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