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गरीबों के राशन पर बड़ा सवाल: ग्राम घाघरला में मुफ्त चावल लेने से ग्रामीणों का इंकारचावल में मरी हुई इल्लियां, खराब गुणवत्ता देखकर भड़के लोग, बोले — “गरीबों की थाली में जहर परोसा जा रहा है”

गरीबों के राशन पर बड़ा सवाल: ग्राम घाघरला में मुफ्त चावल लेने से ग्रामीणों का इंकार
रिपोर्ट हरिओम राठौड़ 
चावल में मरी हुई इल्लियां, खराब गुणवत्ता देखकर भड़के लोग, बोले — “गरीबों की थाली में जहर परोसा जा रहा है”
ग्राम घाघरला में सरकारी राशन वितरण व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। गांव में गरीब परिवारों को मुफ्त योजना के तहत वितरित किए जा रहे चावल की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिली।

 स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कई ग्रामीणों ने राशन दुकान पर ही चावल लेने से साफ इंकार कर दिया और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया।
ग्रामीणों का आरोप है कि जो चावल गरीबों को दिया जा रहा है वह बेहद खराब, सड़ा हुआ और खाने योग्य नहीं है। लोगों ने बताया कि चावल में बदबू आ रही है, दाने टूटे हुए हैं तथा उसमें मरी हुई इल्लियां और कीड़े तक दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि ऐसा अनाज खाने से बीमारी फैल सकती है और लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।

ग्रामीणों ने राशन दुकान पर पहुंचकर विरोध जताया। उनका का कहना हे कि सरकार गरीबों के लिए मुफ्त राशन भेजती है ताकि परिवार का पेट भर सके, लेकिन यहां जो चावल दिया जा रहा है वह पशुओं को खिलाने लायक भी नहीं है। कई ग्रामीणों ने चावल हाथ में लेकर अधिकारियों को दिखाने की मांग की और कहा कि “क्या अधिकारी ऐसा चावल अपने घर में खा सकते हैं?


ग्रामीणों के अनुसार जब चावल के बोरे खोले गए तो उनमें से बदबू आने लगी। कुछ लोगों ने दावा किया कि चावल कई वर्षों पुराना हे। और सड़न साफ दिखाई दे रही थी। लोगों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से खराब अनाज गरीबों में बांटा जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।


इस घटना के बाद राशन दुकान पर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए और उन्होंने खराब चावल वापस लेने की मांग की। लोगों ने कहा कि गरीब परिवार मजबूरी में सरकारी राशन पर निर्भर रहते हैं, लेकिन यदि उसी राशन की गुणवत्ता खराब होगी तो गरीब आखिर क्या खाएंगे।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, चावल के नमूने जांच के लिए भेजे जाएं तथा दोषी सप्लायर और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। 

राशन दुकान संचालक चरण राठौड़ ने बताया कि चावल खराब आए थे हमने वापस कर दिए हैं।

लोगों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द अच्छी गुणवत्ता का राशन उपलब्ध नहीं कराया गया तो गांव के लोग आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
यह मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में राशन वितरण व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

 ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की योजनाओं का लाभ तभी मिलेगा जब गरीबों तक सही और गुणवत्तापूर्ण अनाज पहुंचे। फिलहाल गांव में इस मुद्दे को लेकर भारी चर्चा बनी हुई है और लोग प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

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