संघ का उद्देश्य समाज का सर्वांगीण विकास’-बिडियारे
बुरहानपुर(किशोर चौहान)। देशभक्ति से ओत-प्रोत और शौर्य व साहस की गाथा का जीवंत दर्शन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पथ संचलन। 500से ज्यादा कतारबद्ध स्वयंसेवक, सिर पर काली टोपी, हाथों में लाठियां और कदम से कदम मिलाते हुए घोष की ओजस्वी धुनों पर जब नगर भ्रमण पर निकले तो देखने वाले देखते ही रह गए। हर तरफ भारत माता के वीर सपूतों का देखने भीड़ लग गई। हर धर्म, जाति व सम्प्रदाय के लोगों ने स्वयंसेवकों की हौंसला अफजाई करते हुए उनका क्षेत्र में तालियों से स्वागत किया। यह नजारा मंगलवार दोपहर 4बजे से शाहपुर के सूर्य पूंज विद्यालय मैदान से निकले शाहपुर नगर के स्वयंसेवक गुणवत्ता पथसंचलन में देखने मिला।
पथसंचलन सुर्य पूंज विघालय प्रांगण से,राम मंदिर भोई मोहल्ला,महादेव मंदिर,श्रीकृष्ण मंदिर,वार्ड शांमराव गंणपत की दुकान, शिवा गेट,महावीर गेट, संत रविदास मोहल्ला,बंडा बाजार,चांदनी चौक, बैल बाजार,बंम्भाडा फाटा, चादनी चौक, ऐसी चौराहा, भैरोबाबा चौराहा, छोटा बाजार होते हुए वापस विघालय प्रागण में खत्म हुआ।
राजेश बिडियारे द्वारा वर्ग को संबोधित किया गया। उन्होंने देशभक्ति और भारतभूति के प्रति स्वयंसेवकों को समर्पित होने की बात कही। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्राण शाखा है और शाखा का दूसरा नाम तपस्या है, जो हमारे स्वयंसेवक पिछले 94 साल से अनवरत करते आ रहे हैं।
आज इसी तपस्या का परिणाम सारी दुनिया देख रही है। कोई भी राष्ट्र तब तक विकास के पथ पर अग्रसर नहीं होता जब तक उस राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक का सर्वागींण विकास नहीं हो जाता। संघ अपने स्थापना काल से ही स्वयंसेवकों के सहारे राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक का शारीरिक, सामाजिक एवं बौद्धिक विकास पर ही ध्यान देता आ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि संघ की स्थापना के पहले जो हिन्दू अपने आप को हिन्दू कहने मात्र से ही डर जाता था आज संघ की शक्ति पाकर गर्व से अपने आप को हिन्दू कहता है। शक्ति की उपासना ही संघ की स्थापना का मूल उद्देश्य है।
यही शक्ति जब सज्जन, देशभक्तों के हाथों में होती है तो वह शोभा देती है, और जब दुष्ट व देशद्रोहियों के हाथों में चली जाती है तो समाज में भय उत्पन्न होता है। संघ अपने स्थापना काल से ही राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक के शारीरिक, सामाजिक एवं बौद्धिक विकास पर ही ध्यान दे रहा है जिससे लोग संस्कारवान व अनुशासित बने और यह भारत वर्ष पुनः विश्वगुरु के सिंहासन पर आसीन हो। उन्होंने आगे कहा कि संघ को समझने के लिए संघ की शाखा क्या है इसे समझना पड़ेगा। संघ की शाखा व संघ की शिक्षा हमें संस्कार देती है जो देश के लिए मर मिटने का जज्बा पैदा करती है। अगर संघ को समझना है तो पहले संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार को समझना होगा कि कैसे एक गरीब ब्राहाण के घर पैदा हुए बच्चे ने राष्ट्र के लिए विश्व के सबसे बड़े अनुशासित संगठन को खड़ा कर दिया। साथ ही हमें स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग कर राष्ट्र को सशक्त बनाना चाहिए।
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