भगवान महावीर का संदेश " जियो और जीने दो " जियो का मतलब है अपना कर्तव्य हैं कि दूसरो को भी जीने दो|
बुरहानपुर म प्र (राजूसिंघ राठौड) भगवान महावीर का संदेश " जियो और जीने दो " जियो का मतलब है अपना कर्तव्य हैं कि दूसरो को भी जीने दो|पशु पक्षी को भी स्वतंत्र जीने का अधिकार है| जीवन मे खुद के लिए सब अच्छा चाहते हो तो दूसरो के प्रति भी अच्छे विचार करना चाहिए | हमारा स्वभाव तेरा मेरा का है| वस्तु का स्वभाव जो है वह है |
अनेकांत और सातवाद मे जीना सिखना चाहिए|दुसरे का हक नही मारना चाहिए|ये उध्दबोधन श्रमण मुनि सम्पूर्ण सागर महाराज ने राजपुरा स्थित जैन मंदिर मे प्रवचन मे कहे| श्रमण मुनि प्रणुत सागर महाराज ने कहा कि धर्म का फल क्या है? धर्म का फल सुख है| देव शास्त्र गुरु धर्म की जड है| पेड मे माली पानी जड मे डालता है| उसी प्रकार देव शास्त्र गुरु जड मे सेवा करना चाहिए जिससे आपके जीवन मे फल सुख वाला मिले| जड मे जल डालोगे तो ही फल मिलेगा | बुध्दि से नौकरी या व्यापार नही चलता है| वह सब पूर्व मे किये पुण्योदय से मिलता है| प्रबल पुण्योदय हो तो कम पढे लिखे होने के कारण अच्छी नौकरी या धनवान हो|
हमारी पुण्य की पुंजी बहुत मजबूत होनी चाहिए |ईसके लिए अच्छे काम करना चाहिए| पाप का फल दु:ख ही है | पूर्व के जन्मो का फल कई जन्मो मे मिलता है|पुण्य की पेकिग अच्छी होनी चाहिए । मुनि समिति संयोजक नितिन जैन ने बताया की राजपुरा स्थित श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में दोपहर 2:00 बजे देवास के पंडित संजय जैन शास्त्री ने विधी विधान से विध्नहर पार्श्वनाथ मंडल विधान पुजा की गई। मंडल को रांगोली से बनाया। 158 खंडो मे अघ्य अर्पित किये गये।
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